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अग्निवीरों के लिए खुशखबरी! सेना का कार्यकाल पूरा होने के बाद नौकरी पक्की; हुआ बड़ा ऐलान

Agniveer Scheme:अग्निवीरों को सेना का कार्यकाल पूरा होने के बाद नौकरी की गारंटी दी गई है। सिक्योरिटी कंपनी क्रिस्टल ने उन्हें नौकरी देने का ऐलान किया है। यानी अब सेना से रिटायर होने के बाद अग्निवीरों की नौकरी पक्की है। आपको बताते है कि क्रिस्टल ने अपने इस ऐलान में क्या कहा।

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पूर्व अग्निवीरों के लिए क्रिस्टल का बड़ा ऐलान।

Job guarantee for Agniveers: परिसरों में सुरक्षा मुहैया कराने वाली कंपनी क्रिस्टल ने कहा है कि वह सेना के साथ चार वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके अग्निवीरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए उत्सुक है। क्रिस्टल इंटीग्रेटेड सर्विसेज के मुख्य कार्यपालक अधिकारी संजय दिघे ने बातचीत में कहा कि कुछ प्रतिभाशाली अग्निवीरों को बहुत अच्छा वेतन मिल सकता है।

अग्निवीरों की नौकरी के लिए इस कंपनी ने किया बड़ा ऐलान

संजय दिघे ने कहा, 'क्रिस्टल जैसी कंपनियां मौजूदा ‘अग्निवीरों’ और कॉरपोरेट क्षेत्र के बीच एक अच्छा पुल बन सकती हैं, जो बड़े निवेश वाले कारोबारी परिसरों की सुरक्षा के लिए सही उम्मीदवारों की तलाश कर रहे हैं।' दिघे ने कहा कि सेना की संक्षिप्त सेवा पूरी करने के बाद अग्निवीरों को निजी क्षेत्र में लाभकारी रोजगार मिल जाएगा। उन्होंने कहा, "ऐसी प्रतिभाओं की बहुत मांग है। उन्हें एक सप्ताह भी बेकार नहीं बैठना पड़ेगा।'

5,800 से अधिक सुरक्षा कर्मियों को रोजगार देती है क्रिस्टल

उन्होंने कहा कि कंपनी ने एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी को नियुक्त किया है, जिसे सेना में अपने कार्यकाल के दौरान अग्निवीर योजना को संभालने का अनुभव है। कंपनी वर्तमान में 5,800 से अधिक सुरक्षा कर्मियों को रोजगार देती है। क्रिस्टल इंटीग्रेटेड सर्विसेज ने 24 साल पहले कार्यालय और आवासीय परिसरों में सुरक्षा प्रदाता के रूप में शुरुआत की थी। कंपनी के प्रवर्तक भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रसाद लाड हैं।

बीते लंबे वक्त से ये सवाल उठ रहे हैं कि चार साल की नौकरी पूरी होने के बाद अग्निवीरों के भविष्य का क्या होगा? ऐसे में नौकरी के मद्देनजर कही न कही अग्निवीर के लिए ये थोड़ी राहत भरी जानकारी है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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