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दिल्ली को दहलाने की रची जा रही साजिश? सीआरपीएफ स्कूल ब्लास्ट के बाद सूत्रों ने किया बहुत बड़ा खुलासा

Delhi Blast Case: दिल्ली में रोहिणी के प्रशांत विहार इलाके में सी.आर.पी.एफ स्कूल के पास रविवार सुबह एक जोरदार धमाका हुआ, लेकिन इसके कारण कोई हताहत नहीं हुआ है। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सीआरपीएफ स्कूल ब्लास्ट मामले में सूत्रों ने बड़ा खुलासा किया है।

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दिल्ली के रोहिणी में सीआरपीएफ स्कूल के पास ब्लास्ट मामला।

Photo : ANI

CRPF School Blast: क्या देश की राजधानी दिल्ली को दहलाने की कोई बड़ी साजिश रची जा रही है। सीआरपीएफ स्कूल ब्लास्ट के बाद सूत्रों ने कई बड़े खुलासे किए हैं। घटनास्थल पर धुएं का गुबार उठता हुआ नजर आया। विस्फोट के बाद का एक कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें घना सफेद धुआं नजर आ रहा है। सूत्रों ने दावा किया है कि ये धमाका इसलिए किया गया, क्योंकि साजिशकर्ता एंजेंसी को कोई संदेश देना चाहता था।

सीआरपीएफ स्कूल में पांच केटेगरी में स्टूडेंट्स को सिलेक्ट किया जाता है।

1- सीआरपीएफ ऑफिसर्स के बच्चो को।

2- सीआरपीएफ के रिटायर्ड और हैंडीकैप अफसरों के बच्चो को।

3- दूसरी पैरामिलिट्री फोर्सेस पर्सनल के बच्चों को जैसे आईटीबीपी, बीएसएफ और अन्य।

4- डिफेंस फोर्सेस में तैनात अफसरों के बच्चों को।

5 - अगर सीट बचती है तो नॉन सर्विस वाले लोगो के बच्चों को ट्रेन किया जाता है।

आईजी सीआरपीएफ एडमिन के सुपरविजन में सीआरपीएफ स्कूल चलता है। सूत्रों के मुताबिक जिसने बम प्लांट किया वो एजेंसी को एक मैसेज और सिग्नल देना चाहता था। बम प्लांट करने वाले ने बम प्लांट करके मैसेज देने के लिए सीआरपीएफ के स्कूल की दीवार को चुना।

संदिग्ध ने सुबह का वक्त चुना और सेंट्रल दिल्ली या भीड़ का समय बम प्लांट करने का नहीं चुना। जिस तरह से सुबह का वक्त और दीवार साइड बम प्लांट किया गया, उससे संदिग्ध की मंशा साफ है, मकसद बस मैसेज देना था कोई बड़ा ब्लास्ट करना नहीं।

बम प्लांट करने का मकसद पता लगाने में जुटी एजेंसियां

जांच एजेंसियों को मौके से जो सफेद पाउडर मिला है, उसमें शक है इस देसी बम, कच्चे बम जिसे क्रूड कहा जाता है। उसमें ऐमोनियम पोस्फेट और कुछ कैमिकल्स मिलाकर बम बनाया गया होगा। हालांकि एफएसएल, सीआरपीएफ और एनएसजी ने जो ब्लास्ट के बाद मौके से कण जुटाए हैं, जांच के बाद एग्जेक्ट कैमिकल का पता लग पाएगा, कुछ वायर मिले हैं पर वो पहले से स्पॉट पर थे या नहीं ये जांच की जा रही है। गृह मंत्रालय को जांच एजंसी रिपोर्ट सौपेंगी, जिसके बाद बम प्लांट करने का मकसद पता लग पाएगा।

पुलिसकर्मियों समेत बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा

दिल्ली में रोहिणी के प्रशांत विहार इलाके में सी.आर.पी.एफ स्कूल के पास रविवार सुबह एक जोरदार धमाका हुआ, लेकिन इसके कारण कोई हताहत नहीं हुआ है। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि रोहिणी के सेक्टर-14 में सी.आर.पी.एफ स्कूल के पास सुबह करीब सात बजकर 50 मिनट पर धमाका हुआ था, जिसके बाद बम निरोधक दस्ता और पुलिस की एक फोरेंसिक टीम विस्फोट होने के कारण का पता लगाने के लिए मौके पर पहुंची। पुलिस ने बताया कि इस धमाके में स्कूल की दीवार, पास की दुकानें और एक कार को नुकसान पहुंचा है।

दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने बताया कि उन्हें सीआरपीएफ स्कूल की ‘चारदीवारी के पास’ में धमाका होने की सूचना मिली थी। डीएफएस के अधिकारियों ने बताया, 'सूचना मिलने के बाद हमने तुरंत दमकल की दो गाड़ियों को मौके पर भेजा। धमाका होने के कारण आग नहीं लगी है और न ही कोई घायल हुआ है, इसलिए हमारी गाड़ी वापस लौट आई।' एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, 'हमारी फोरेंसिक टीम और अपराध इकाई घटनास्थल से नमूने एकत्र करने के लिए मौके पर मौजूद है। एक पटाखे के कारण यह धमाका हो सकता है, लेकिन हम इस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।' पुलिस ने बताया कि वे घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं।

पुलिस ने एक बयान में कहा कि उसे सुबह 7.47 बजे एक जोरदार धमाका होने की सूचना मिली थी। उसने बताया, 'धमाका होने से स्कूल की दीवार क्षतिग्रस्त पाई गई और वहां दुर्गंध आ रही थी। प्रशांत विहार के थाना प्रभारी और अन्य कर्मी मौके मौजूद हैं। पास की दुकान और दुकान के पास खड़ी कार के शीशे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है।' पुलिस ने बताया, 'अपराध शाखा की टीम, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) टीम और बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया है। घटनास्थल की घेराबंदी कर दी गई है। दमकल विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद है।'

पुलिस ने कहा कि वे विस्फोट के कारण का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। एक स्थानीय ने बताया, 'सुबह करीब 7.30 बजे हमने बहुत तेज आवाज सुनी। हमें लगा कि पास में ही कोई एलपीजी सिलेंडर फट गया है। हमने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को मामले की जानकारी दी। कई दुकानों के शीशे टूट गए हैं।' पास में रहने वाले राकेश गुप्ता ने बताया कि धमाका होने के तुरंत बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। गुप्ता ने बताया, 'हम इस बात को लेकर बहुत उलझन में हैं कि आखिर क्या हुआ है। पुलिस की कई टीम जांच कर रही हैं।' घटनास्थल के बहुत करीब चश्मे की दुकान के मालिक सुमित ने बताया, 'मेरी खिड़की के शीशे टूट गए। मेरी दुकान के अंदर का सारा सामान जमीन पर गिर गया। यह बहुत तेज धमाका था।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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