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मुर्शिदाबाद हिंसा के लिए ममता बनर्जी जिम्मेदार; पश्चिम बंगाल की सीएम पर किसने लगाया ये सनसनीखेज आरोप?

सीपीआई (एम) ने मुर्शिदाबाद हिंसा के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है। लेफ्ट ने ये कहा है कि हिंसा को तुरंत रोका जाए। पार्टी नेता हन्नान मोल्लाह ने मुर्शिदाबाद हिंसा के दौरान तीन लोगों की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि ममता सरकार में लॉ एंड ऑर्डर के नाम पर कुछ नहीं बचा है।

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मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर ममता बनर्जी पर लगे गंभीर आरोप।

Murshidabad Violence: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा पर सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह राज्य में हो रही हिंसा को रोके।

'वक्फ की जमीन को हड़पना चाहती है भाजपा सरकार'

सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा, 'वक्फ कानून हमारे देश के संविधान और अल्पसंख्यकों के खिलाफ है। यह कानून आरएसएस की एंटी-माइनॉरिटी फिलॉसफी से प्रेरित है। हर तरह से अल्पसंख्यकों पर हमला हो रहा है और यह हमला भी उनमें से एक है। वक्फ को एक रात में नहीं बनाया गया है बल्कि हजारों साल से मौजूद है, जिसे एक धार्मिक नीति के आधार पर बनाया गया है। कोई भी शख्स ईश्वर के नाम पर अपनी संपत्ति को दान करता है और फिर वह संपत्ति ईश्वर की हो जाती है, जिसे न तो कोई खरीद सकता है और न ही कोई दान कर सकता है। मगर, भाजपा सरकार वक्फ की जमीन को हड़पना चाहती है।'

मुर्शिदाबाद हिंसा के लिए ममता बनर्जी को ठहराया जिम्मेदार

उन्होंने कहा, 'वक्फ कानून को लेकर पूरे देश में अलग-अलग जगह पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। बंगाल में भी प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन ये प्रदर्शन अब हिंसक हो चुके हैं। ममता बनर्जी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस हिंसा को रोके। ममता सरकार में लॉ एंड ऑर्डर के नाम पर कुछ नहीं बचा है। वहां खून-खराबा हो रहा है और महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहा है। इतना ही नहीं, पुलिस लोगों पर लाठी चार्ज कर रही है। मैं भी चाहता हूं कि आंदोलन शांतिपूर्ण हो और यह राज्य सरकार के ऊपर है कि वह कानून को लागू करती है या नहीं।'

हन्नान मोल्लाह ने मुर्शिदाबाद हिंसा के दौरान तीन लोगों की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा, 'यह बेहद निंदनीय है। वहां चल रहे विरोध प्रदर्शन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसी वजह से कलकत्ता हाई कोर्ट ने केंद्रीय बलों की तैनाती करने का निर्देश दिया है। ममता बनर्जी के राज में लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह से फेल हो चुका है।'

शराबबंदी के मुद्दे पर सीपीआई (एम) नेता ने लगाया गंभीर आरोप

बिहार में शराबबंदी पर सीपीआई (एम) नेता ने कहा, 'शराबबंदी एक नाटक है, फिर चाहे वह बिहार में हो या फिर गुजरात में। यह कई सालों से चल रहा है, जब शराबबंदी होती है तो ज्यादा शराब सप्लाई होती है। इसकी वजह से कालाबाजारी होती है, जहां पर शराबबंदी हुई वहां पर जमकर कालाबाजारी हो रही है। पीने वाले कम नहीं हो रहे हैं। इस तरीके के नाटकों को बंद करना चाहिए। शराब पर नियंत्रण होना चाहिए और इसका सही ढंग से व्यापार होना चाहिए। अगर गलत तरीके से इसका इस्तेमाल हो रहा है तो उस पर राज्य सरकार को नियंत्रित करना चाहिए।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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