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महाठग का महाऐलान: रॉबिनहुड बनने की राह पर सुकेश चंद्रशेखर, वायनाड त्रासदी के लिए 15 करोड़ और 300 मकान बनाने की घोषणा

Sukesh Chandrashekhar News: सुकेश चंद्रशेखर इस समय मंडोली जेल में बंद हैं। उसने केरल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में 15 करोड़ रुपये के योगदान देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उसने कहा है कि वह वायनाड लैंडस्लाइड में प्रभावित लोगों के लिए 300 मकान बनाना चाहता है।

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सुकेश चंद्रशेखर।

Sukesh Chandrashekhar News: जेल में बंद कथित महाठग सुकेश चंद्रशेखर अब रॉबिनहुड बनने की राह पर निकल पड़ा है। उसने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को पत्र लिखकर वायनाड भूस्खलन को लेकर बड़ा ऐलान किया है। सुकेश चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में 15 करोड़ रुपये के योगदान को स्वीकार किए जाने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही 300 मकान बनाने की भी घोषणा की है।

सुकेश की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया हे कि केरल जिस स्थिति से गुजर रहा है, वह उसे देखकर बहुत दुखी है और जरूरत के इस समय में वह सहायता करना चाहता है। चंद्रशेखर के वकील अनंत मलिक ने उसके द्वारा यह पत्र लिखे जाने की पुष्टि की है। पत्र में कहा गया है, मैं अपने फाउंडेशन की ओर से मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष के लिए 15 करोड़ रुपये का योगदान स्वीकार किए जाने का अनुरोध करता हूं।

प्रभावितों के लिए 300 मकान बनाएगा सुकेश

सुकेश ने इस पत्र में आगे लिखा कि आज किए जा रहे उपर्युक्त योगदान के अलावा, मैं प्रभावितों की मदद के मकसद से 300 मकानों के तत्काल निर्माण में योगदान के लिए भी अपना सहयोग देने का वचन देता हूं। चंद्रशेखर ने दावा किया कि यह योगदान वैध व्यावसायिक खातों से दिया जाएगा। उसने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि वह इस प्रस्ताव को स्वीकार करे और इसका उपयोग भूस्खलन त्रासदी से प्रभावित लोगों के कल्याण और पुनर्वास के लिए करे।

केरल सरकार ने नहीं दिया जवाब

केरल सरकार ने चंद्रशेखर के पत्र का अभी तक जवाब नहीं दिया है। कथित ठग और उसकी पत्नी धन शोधन एवं कई लोगों को धोखा देने के आरोप में जेल में बंद हैं। अधिकारियों के अनुसार, 30 जुलाई को मुंडक्कई और चूरलमाला में हुए विनाशकारी भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 226 हो गई है। स्थानीय प्रशासन द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, 138 लोग अब भी लापता हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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