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महंगाई ने तोड़ी कमर तो EMI पर हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भर रहे लोग, रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

महंगे इलाज और बढ़ते खर्च के बीच हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना लोगों के लिए चुनौती बन रहा है। ऐसे में अब कई ग्राहक पूरा प्रीमियम एक साथ देने के बजाय मासिक या तिमाही किस्तों का विकल्प चुन रहे हैं। जानिए क्या है पूरा मामला।

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Health Insurance Claim

महंगाई के इस दौर में घर का बजट संभालना आसान नहीं है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर इलाज और दवाइयों तक का खर्च बढ़ने से लोगों की जेब पर दबाव पड़ रहा है। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस यानी स्वास्थ्य बीमा लेना जरूरी तो है, लेकिन इसका पूरा सालाना प्रीमियम एक साथ चुकाना कई परिवारों के लिए मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से कुछ लोग अब हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम एकमुश्त देने के बजाय हर महीने या तीन महीने में किस्तों के रूप में भरना पसंद कर रहे हैं। पॉलिसीबाजार के आंकड़ों में यह बदलाव सामने आया है।

रिपोर्ट में हुआ खुलासा

पॉलिसीबाजार के अनुसार, उसके करीब 13 फीसदी ग्राहक हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम मासिक या तिमाही किस्तों में चुकाने का विकल्प चुन रहे हैं। इन ग्राहकों के लिए औसत सालाना प्रीमियम या किस्त की रकम करीब 17,500 रुपये बताई गई है। हालांकि, यह आंकड़ा केवल पॉलिसीबाजार के ग्राहकों से जुड़ा है। इसे पूरे देश के हेल्थ इंश्योरेंस बाजार का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। इससे यह जरूर पता चलता है कि कुछ ग्राहक बीमा का खर्च एक साथ उठाने के बजाय उसे छोटी-छोटी किस्तों में बांटना पसंद कर रहे हैं।

किस्तों में कैसे भर सकते हैं प्रीमियम?

इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए कि किसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का सालाना प्रीमियम 12,000 रुपये है और ग्राहक तीन साल के लिए पॉलिसी लेता है। इस तरह तीन साल का कुल प्रीमियम 36,000 रुपये होगा। अगर बीमा कंपनी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के 36 बराबर मासिक किस्तों का विकल्प देती है, तो ग्राहक को हर महीने 1,000 रुपये देने होंगे। इससे एक बार में बड़ी रकम खर्च करने का दबाव कम हो सकता है और परिवार के मासिक बजट में बीमा के लिए पैसे अलग रखना आसान हो सकता है। हालांकि, वास्तविक भुगतान पॉलिसी की शर्तों और बीमा कंपनी के नियमों पर निर्भर करेगा।

महंगाई के बीच क्यों बढ़ रही है किस्तों की जरूरत?

अस्पताल में भर्ती होने, जांच कराने, ऑपरेशन और दवाइयों का खर्च बढ़ने के कारण स्वास्थ्य बीमा की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है। लेकिन प्रीमियम का भुगतान भी घरेलू बजट को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में किस्तों का विकल्प उन लोगों के लिए मददगार हो सकता है जो एक साथ बड़ी रकम नहीं देना चाहते। इससे वे अपने खर्च की बेहतर योजना बना सकते हैं, लेकिन किस्तों में भुगतान करने का मतलब यह नहीं है कि पॉलिसी सस्ती हो ही जाएगी।

EMI चुनने से पहले इन बातों का रखें ध्यान। हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम किस्तों में भरने से पहले यह जरूर जांचें कि बीमा कंपनी कोई अतिरिक्त शुल्क तो नहीं ले रही है। किस्त जमा करने की तारीख, भुगतान में देरी होने पर मिलने वाली छूट अवधि और भुगतान न करने के परिणाम भी समझें। कुछ पॉलिसियों में क्लेम के समय बाकी किस्तों के भुगतान से जुड़े नियम हो सकते हैं। इसलिए पॉलिसी के दस्तावेज ध्यान से पढ़ना जरूरी है। केवल कम मासिक किस्त देखकर बीमा न चुनें, बल्कि यह भी देखें कि इलाज में कितना कवर मिलेगा, कौन-सी बीमारियां शामिल हैं और किन खर्चों की भरपाई नहीं होगी।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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