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NEET विवाद पर कौन कर रहा लीपापोती की कोशिश? जानें कांग्रेस ने क्यों लगाया ये गंभीर आरोप

NEET Controversy: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नए परीक्षा कानून को लागू करना लीपापोती का प्रयास है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी महासचिव जयराम रमेश और प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया है और गंभीर सवाल उठाया है। आपको सारा माजरा बताते हैं।

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कांग्रेस ने मोदी सरकार पर लगाया गंभीर आरोप।

Photo : Times Now Digital

Congress vs BJP on NEET: कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि नीट-स्नातक, यूजीसी-नेट को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार द्वारा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को अधिसूचित किया जाना लीपापोती का एक प्रयास है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि जब तक शिक्षा प्रणाली व स्वायत्त संस्थानों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की दखलंदाजी से मुक्त नहीं किया जाता तब तक यह धांधली और भ्रष्टाचार जारी रहेगा।

केंद्र सरकार ने अधिसूचित किया है अधिनियम

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) को लेकर विवाद के बीच, केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 अधिसूचित किया, जिसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कदाचार और अनियमितताओं पर अंकुश लगाना है। इस अधिनियम के तहत अपराधियों के लिए अधिकतम 10 साल की जेल की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी सरकार पर उठाया सवाल

खड़गे ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'नीट घोटाले में भाजपा जितनी भी कोशिश कर ले, धांधली, भ्रष्टाचार और शिक्षा माफिया को बढ़ावा देने की अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।' उन्होंने दावा किया कि प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कानून अधिसूचित नहीं हुआ था, लेकिन जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की प्रेस वार्ता में उनसे इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह कानून अधिसूचित हो गया है।

खड़गे ने पूछा- शिक्षा मंत्री ने झूठ क्यों बोला?

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, '13 फरवरी 2024 को इस कानून को राष्ट्रपति जी की संस्तुति मिल गई थी,पर कानून बीती रात को ही अधिसूचित हुआ है।' उन्होंने सवाल किया कि शिक्षा मंत्री ने झूठ क्यों बोला? खड़गे ने यह प्रश्न भी किया कि जब शिक्षा मंत्री ने नीट परीक्षा में गड़बड़ी की बात मान ली है तो मोदी सरकार परीक्षा दोबारा क्यों नहीं करवा रही? प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कानून पारित करवाने के बाद भी पेपर लीक क्यों हो रहे हैं? गत सात वर्षों में जब 70 पेपर लीक हुए, तब मोदी सरकार ने उसपर कोई कड़ा कदम क्यों नहीं उठाया?

उन्होंने आरोप लगाया कि नया कानून लाना केवल भाजपाई लीपापोती ही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'जब तक शिक्षा प्रणाली व स्वायत्त संस्थानों को भाजपा-आरएसएस की दखलंदाज़ी व दुष्प्रभाव से मुक्त नहीं किया जाएगा...तब तक ये धांधली चोरी, भ्रष्टाचार जारी रहेगा।'

जयराम रमेश ने सरकार पर खड़ा किया सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, '13 फरवरी 2024 को राष्ट्रपति ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 को अपनी मंजूरी दी थी। अंततः आज सुबह देश को बताया गया कि यह अधिनियम कल, यानी 21 जून, 2024 से लागू हो गया है।'

उन्होंने कहा कि स्पष्ट रूप से यह नीट, यूजीसी-नेट, सीएसआईआर-यूजीसी-नेट और अन्य घोटालों से पैदा हुई स्थिति को संभालने की कोशिश है। रमेश ने यह भी कहा, 'इस कानून की जरूरत थी, लेकिन यह प्रश्नपत्र लीक होने के बाद के मामले से निपटता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कानून, प्रणालियां और प्रक्रियाएं अधिक महत्वपूर्ण हैं कि प्रश्नपत्र लीक ही नहीं हो।'

प्रियंका गांधी ने एनटीए को बताया ‘नो ट्रस्ट एजेंसी’

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में एनटीए अब ‘नो ट्रस्ट एजेंसी’ बन गया है और परीक्षाएं एक भयावह त्रासदी बनकर रह गई हैं। उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'भाजपा द्वारा लाई गई इस त्रासदी का शिकार देश के लाखों मेहनती बच्चे और माता-पिता हो रहे हैं और शिक्षा मंत्रालय कमेटी-कमेटी खेल रहा है।'

प्रियंका गांधी ने सवाल किया, 'कब तय होगी जिम्मेदारी? कब होगी कार्रवाई?' गौरतलब है कि नीट-यूजी परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) करती है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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