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भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौते के श्रेय पर सियासत, जयराम रमेश बोले-'यह मनमोहन सिंह की वजह से मुमकिन हुआ'

Australia India Uranium Supply: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम सप्लाई समझौते के लागू होने पर देश में सियासी जंग छिड़ गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम मिलना सिर्फ इसलिए मुमकिन हुआ है क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2008 में ऐतिहासिक भारत-अमेरिका परमाणु समझौता किया था, जिसका बीजेपी ने उस समय कड़ा विरोध किया था।

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ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम डील पर भारत में घमासान

Photo : ANI

Australia India Uranium Supply: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम की सप्लाई का रास्ता साफ होने के बाद देश में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम मिलने का यह ऐतिहासिक फैसला केवल और केवल कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की वजह से मुमकिन हो पाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी बड़े गर्व से एलान कर रहे हैं कि ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम देगा, लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि इसकी नींव डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार ने रखी थी। जयराम रमेश के मुताबिक, "यह सब सिर्फ इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि 8 अक्टूबर 2008 को भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता कानून बना था। साल 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की मुलाकात ने इस पूरी बातचीत को शुरू किया था।"

उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए आगे कहा, "बीजेपी ने संसद के भीतर और बाहर इस ऐतिहासिक समझौते का कड़ा विरोध किया था। सच तो यह है कि कांग्रेस हमेशा बड़े 'टर्निंग पॉइंट' यानी बदलाव लाती है, जबकि बीजेपी का काम सिर्फ 'यू-टर्न' लेना है।"

क्या है यह पूरा यूरेनियम समझौता?

दरअसल, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने साल 2014 में ही एक असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर दस्तखत किए थे। लेकिन तकनीकी और रिपोर्टिंग से जुड़े कुछ मुद्दों पर दोनों देशों के बीच पूरी सहमति नहीं बन पा रही थी, जिसकी वजह से यूरेनियम की सप्लाई रुकी हुई थी।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दो सालों से दोनों देशों के बीच बेहद गंभीर और गहन बातचीत चल रही थी। आखिरकार, दोनों पक्षों ने उन कमियों और चिंताओं को दूर कर लिया है जो अकाउंटिंग और रिपोर्टिंग से जुड़ी थीं। यह एक सरकार-से-सरकार (G-to-G) के स्तर का समझौता है, जिसने एक मजबूत ढांचा तैयार कर दिया है। अब भारत और ऑस्ट्रेलिया की निजी और सरकारी कंपनियां आपस में कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट कर यूरेनियम का आयात-निर्यात शुरू कर सकेंगी।

पीएम मोदी और अल्बनीज के बीच हुई बैठक में क्या कहा गया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज के बीच हुई बैठक (PM Modi Anthony Albanese Meeting) के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि यह यूरेनियम पूरी तरह से शांतिपूर्ण कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा और यह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में होगा। पीएम मोदी ने कहा कि इस समझौते से भारत के स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) के लक्ष्यों को एक नई ताकत मिलेगी। वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में भारत की स्थाई सदस्यता का पुरजोर समर्थन किया है।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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