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केरल की नीलांबुर सीट पर कांग्रेस का कब्जा, आर्यदान शौकत ने माकपा उम्मीदवार को हराया

Nilambur Assembly by-elections : केरल की नीलांबुर सीट कांग्रेस-यूडीएफ के खाते में गई है। इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार आर्यदान शौकत को जीत मिली है। आर्यदान ने माकपा उम्मीदवार एम स्वराज को हराया। इस सीट पर शौकत को 77737 वोट और स्वराज को 66660 वोट मिले। तीसरे स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार पीवी अनवर रहे।

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नीलांबुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी विजयी।

Nilambur Assembly by-elections : केरल की नीलांबुर सीट कांग्रेस-यूडीएफ के खाते में गई है। इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार आर्यदान शौकत को जीत मिली है। आर्यदान ने माकपा उम्मीदवार एम स्वराज को हराया। इस सीट पर शौकत को 77737 वोट और स्वराज को 66660 वोट मिले। तीसरे स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार पीवी अनवर रहे। शौकत दिवंगत वरिष्ठ कांग्रेस नेता आर्यदान मुहम्मद के पुत्र हैं जबकि स्वराज माकपा के राज्य सचिवालय के सदस्य हैं।

वाम उम्मीदवार ने शौकत को बधाई दी

वाम उम्मीदवार ने शौकत को बधाई दी। स्वराज ने कहा कि एलडीएफ नतीजों का बारीकी से विश्लेषण करेगा। हालांकि उन्होंने वाम सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर की बात को खारिज कर दिया। शौकत ने कहा कि परिणाम अपेक्षित था। उन्होंने, ‘केरल के लोगों की बदौलत जीत अपेक्षित थी जो एलडीएफ सरकार के खिलाफ बड़ी जीत है।’ निर्दलीय उम्मीदवार और दो बार के विधायक रहे पी. वी. अनवर ने नीलांबुर सीट पर उपचुनाव में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए यूडीएफ और एलडीएफ दोनों को हैरान कर दिया।

मतगणना सुबह आठ बजे शुरू हुई

बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे तृणमूल कांग्रेस के अनवर ने 18वें दौर की गणना के बाद 18,823 वोट प्राप्त किए थे जो भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार मोहन जॉर्ज को मिले 8,241 मतों से काफी अधिक थे। मतगणना सुबह आठ बजे चुंगथारा मार थोमा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शुरू हुई। शौकत के स्वराज पर बढ़त हासिल करने पर नीलांबुर और केरल के कुछ हिस्सों में यूडीएफ खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। कांग्रेस नेता और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने उपचुनाव में चुनाव प्रचार अभियान का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा कि यूडीएफ 2026 में सत्ता हासिल करेगा।

पी. वी. अनवर के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी सीट

सतीशन ने ‘फेसबुक’ पोस्ट में कहा, ‘जब समर्पित कार्यकर्ता और नेता होते हैं जो पूरे दिल से मोर्चे से प्यार करते हैं... यूडीएफ लोगों का दिल जीत लेगा। यह यूडीएफ है, एक ‘यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) जो एक पार्टी की तरह काम करता है। 2026 में यूडीएफ एक तूफान की तरह वापस आएगा।’ सबसे पहले डाक मतपत्रों की और उसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में दर्ज मतों की गिनती शुरू की गई। नीलांबुर सीट विधायक पी. वी. अनवर के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी, जहां सत्तारूढ़ एलडीएफ और यूडीएफ के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। एलडीएफ सरकार के मौजूदा कार्यकाल का यह चौथा साल है और चुनावी विश्लेषक इस उपचुनाव को एलडीएफ सरकार के लिए मध्यावधि परीक्षा के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के लिए यह जीत अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले उसका मनोबल बढ़ाने का काम करेगी।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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