केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में 14 वकीलों को एडिशनल जज नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी है। पिछले हफ्ते ही सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार के पास भेजा था। दिलचस्प बात है कि जज बनने वालों की लिस्ट में देश के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई के भांजे का भी नाम शामिल है। कॉलेजियम के इस प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पहले ही सवाल खड़े कर चुके हैं।
जस्टिस बनने वाले वकीलों के नाम यहां पढ़ें
जिन 14 वकीलों को बॉम्बे हाईकोर्ट के एडिशनल जज के रूप में नियुक्ति किया गया है, उनके नाम हैं-
* सिद्धेश्वर सुंदरराव थोम्ब्रे
* मेहरोज अशरफ खान पठान
* रंजीतसिंह राजा भोसले
* नंदेश शंकरराव देशपांडे
* अमित सत्यवान जामसंदेकर
* आशीष साहदेव चव्हाण
* वैषाली निम्बाजीराव पाटिल-जाधव
* संदीश दादासाहेब पाटिल
* आबासाहेब धर्माजी शिंदे
* श्रीराम विनायक शिर्साट
* हितेन शंकरराव वेनेगावकर
* फरहान परवेज दुबाश
* रजनीश रत्नाकर व्यास
* राज दामोदर वाकोड़े
CBI-ED का का केस लड़ चुके हैं कुछ वकील
इन 14 लोगों की सूची में से संदीश पाटिल और श्रीराम शिर्साट केंद्र सरकार के विशेष लोक अभियोजक (SPP) रहे हैं और उन्होंने सीबीआई, एनआईए और ईडी जैसी प्रमुख एजेंसियों का पक्ष अदालतों में रखा है। वहीं हितेन वेनेगावकर महाराष्ट्र के चीफ पब्लिक प्रॉसिक्यूटर या राज्य के प्रमुख सरकारी वकील रहे हैं। वहीं फरहान दुबाश इस समय बॉम्बे बार एसोसिएशन के सचिव हैं।
CJI गवई के रिश्तेदार भी बने जज
केंद्र सरकार ने जिन अधिवक्ताओं के नाम को हरी झंडी दी है उनमें राज दामोदर वाकोड़े का नाम भी शामिल है। वाकोड़े सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई के भांजे हैं। इसी वजह से यह नियुक्ति खास चर्चा में बनी हुई है। वाकोड़े भारत के चीफ जस्टिस (CJI) बी.आर. गवई के भांजे बताए जा रहे हैं। जो उनकी चचेरी बहन के बेटे हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट के जजों की संख्या बढ़ी
इन नियुक्तियों के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या अब 83 हो गई है। हालांकि अभी ये मंजूर पदों की संख्या 94 से कम है। नए जजों की नियुक्ति के बाद हाइकोर्ट में लंबित मामलों के निबटारे में तेजी भी आएगी।
भारत में हाईकोर्ट जज बनने की प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 217 के मुताबिक किसी व्यक्ति को हाईकोर्ट का जज तब नियुक्त होने के लिए सबसे पहले भारत का नागरिक हो और कम से कम 10 साल तक किसी हाईकोर्ट में वकालत की हो। या दूसरी योग्यता ये है कि कम से कम 10 साल तक किसी न्यायिक पद पर कार्य किया हो। इसके बाद सबसे पहले राज्य का हाईकोर्ट की कॉलेजियम योग्य नामों को ही आगे भेजती है।
राज्य से आए प्रस्ताव को फिर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम जिसमें मुख्य न्यायाधीश समेत पांच वरिष्ठतम जज शामिल होते हैं वो उसे परखते हैं। नामों की जांच कर तय करते हैं कि कौन से जज को नियुक्त किया जा सकता है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशें केंद्र सरकार को भेजी जाती हैं। कानून मंत्रालय, गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय स्तर पर नामों की सुरक्षा और प्रशासनिक जांच होने के बाद नामों को हरी झंडी दे देती जाती है।
एडिशनल जज बनाम परमानेंट जज, क्या है फर्क
शुरुआत में वकीलों को एडिशनल जज के तौर पर 2 साल के लिए ही नियुक्त किया जाता है। उनके कामकाज और प्रदर्शन के आधार पर बाद में परमानेंट जज बनाया जाता है। हाइकोर्ट के जज ही बाद में वरिष्ठता और सिफारिश के आधार पर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते हैं।
