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CGHS अस्पतालों में OPD-ICU चार्ज में इजाफा, जानें किन लोगों को मिलेगा फायदा; देखें पूरी लिस्ट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 17, 2023, 02:21 PM IST

CGHS Hospital Charges: केंद्र सरकार ने नए बदलाव के तहत ओपीडी परामर्श शुल्क, आईसीयू चार्ज और रूम रेंट में इजाफा किया है। इस बदलाव का लाभ करीब 42 लाख लोगों को मिलेगा।

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CGHS अस्पतालों में OPD-ICU चार्ज में इजाफा

Photo : BCCL

CGHS Hospital Charges: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के तहत प्राइवेट अस्पतालों के चार्ज में इजाफा किया गया है। केंद्रीय सरकार के मुताबिक, इस बढ़ोत्तरी से इस स्कीम के तहत करीब 42 लाख लोगों को राहत पहुंचेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने OPD, ICU के साथ ही अस्पताल में कमरे के चार्ज में भी बढ़ोतरी की है।

बता दें, केंद्र सरकार सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के तहत प्राइवेट अस्पतालों में रियायत देती है। सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों व चुनिंदा लाभार्थी समूहों के साथ उनके आश्रितों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में काम करता है। इस स्कीम के तहत करीब 42 लाख लोग छूट के साथ निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा प्राप्त कर सकते हैं।

यहां देखें CGHS की रेट लिस्ट

ओपीडी परामर्श शुल्क - 150 से 350 रुपये

आईपीडी परामर्श शुल्क ' 50 से 350 रुपये

आईसीयू चार्ज - 5400 रुपये प्रति दिन

रूम रेंट -

  • जनरल रूम - 1500
  • सेमी प्राइवेट रूम - 3000
  • प्राइवेट रूम - 4500 रुपये

बढ़ेगा 240 से 300 करोड़ का खर्च

इस बढ़ोत्तरी के बाद सरकार पर 240-300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। बता दें, स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 2014 के बाद पहली बार यह संशोधन किया गया है। इस संशोधन की काफी लंबे समय से मांग की जा रही थी। इसके साथ ही सरकार ने बड़े अस्पतालों में रेफरल प्रक्रियाओं को भी काफी आसान बनाया है।

इन बड़े अस्पतालों में आसान होगा इलाज

केंद्र सरकार की ओर से किए गए बदलाव के बाद लाखों लोगों का प्राइवेट अस्पतालों में इलाज आसान हो जाएगा। बता दें, इस योजना से 1670 निजी अस्पताल ओर 213 लैब लिस्टेड हैं। इन अस्पतालों में मेदांता, फोर्टिस, अपोलो, मैक्स, मणिपाल जैसे कई अस्पताल शामिल हैं। बता दें, सीजीएचएस देश के 79 शहरों में फैला हुआ है और पंचकुला, हुबली, नरेला, चंडीगढ़ और जम्मू में इसका विस्तार किया जा रहा है।

इस तरह होगा मरीजों को फायदा

दरअसल, सरकार की ओर से अस्पतालों की दरें कम होने के कारण अस्पताल इलाज में आनाकानी करते थे। अस्पतालों का कहना था कि सीजीएचएस की इतनी कम दरों में इलाज संभव नहीं है। ऐसे में अंतर की राशि का भुगतान मरीजों को खुद-ब-खुद करना पड़ता था। ऐसे में कई बाद अस्पताल और मरीजों के बीच विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती थी। हालांकि, दरों को बढ़ाए जाने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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