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तेल की किल्लत, दाम बढ़ते जा रहे...केंद्र सरकार आपदा के बीच शुरू कर रही नया अभियान, देशभर में होगी छिपे भंडारों की खोज

Oil Gas Crisis: सरकार चाहती है आधुनिक इमेजिंग और व्याख्या उपकरणों का इस्तेमाल करके दशकों पुराने भूवैज्ञानिक डेटा की फिर से जांच करें, ताकि यह पता चल सके कि क्या पिछले सर्वेक्षणों में तेल के संभावित भंडार छूट गए थे।

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तेल की किल्लत, दाम बढ़ते जा रहे...केंद्र सरकार आपदा के बीच शुरू कर रही नया अभियान, देशभर में होगी छिपे भंडारों की खोज

Oil Shortage in India: भारत जल्द ही अपनी जमीन के नीचे छिपे तेल और गैस की खोज का एक नया अभियान शुरू कर सकता है, लेकिन तुरंत ड्रिलिंग करके नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक की मदद से पुराने भूमिगत डेटा को फिर से देखकर। असल में यह भारत सरकार की ओर से एक संकेत है कि वह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके भारत के भीतर तेल और गैस के भंडारों की खोज को एक नई और बड़ी गति देने जा रही है।

बीते दिन सोमवार को जारी एक सार्वजनिक सूचना में, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कंपनियों को एक ऐसे बड़े अभियान में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया है, जिसे अधिकारी 'पुराने भूकंपीय डेटा को फिर से प्रोसेस करने' और पूरे देश में मौजूद तलछटी बेसिनों में नए 3D भूकंपीय सर्वेक्षण करने का एक बड़े पैमाने का प्रयास बता रहे हैं।

क्या छूट गए थे भारत में तेल व गैस भंडार?

नोटिस के अनुसार, इसका उद्देश्य 'भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना और आयात पर निर्भरता को कम करना' है। आसान शब्दों में कहें तो सरकार चाहती है कि विशेषज्ञ आज के आधुनिक इमेजिंग और व्याख्या उपकरणों का इस्तेमाल करके दशकों पुराने भूवैज्ञानिक डेटा की फिर से जांच करें, ताकि यह पता चल सके कि क्या पिछले सर्वेक्षणों में तेल और गैस के संभावित भंडार छूट गए थे। वहीं, इस काम का समन्वय हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) कर रहा है, जो पेट्रोलियम मंत्रालय की तकनीकी शाखा है।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि मोदी सरकार भारत के पूर्वी तट पर हजारों किलोमीटर तक फैले एक बड़े ऑफशोर तेल और गैस खोज सर्वे की भी योजना बना रही है। यह पूर्णिया और महानदी बेसिन, कृष्णा गोदावरी बेसिन, कावेरी बेसिन और अंडमान (पूर्वी) बेसिन में एक बड़ा भूवैज्ञानिक सर्वे होगा। सरकार चाहती है कि विशेष ऊर्जा-सर्वे कंपनियां समुद्र तल के नीचे गहराई में मौजूद चीजों का नक्शा तैयार करें, ताकि यह पता चल सके कि वहां व्यावसायिक रूप से फायदेमंद तेल या प्राकृतिक गैस के भंडार हैं या नहीं।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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