भारत में जनगणना 2027 का पहला चरण एक अप्रैल से शुरू हो जाएगा, इसमें कुल 33 प्रकार के सवाल जनता से पूछे जाएंगे। जिसमें घर से लेकर परिवार तक की जानकारी देनी होगी। अब सवाल ये है कि जनता से लिया गया ये डेटा कितना सुरक्षित होगा, क्या सरकार के पास यह डेटा सुरक्षित रहेगा, किसी को मिलेगा तो नहीं? इन सारे सवालों के जवाब सोमवार को भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायणन ने दे दिया है।
जनगणना का डेटा कितना सुरक्षित?
जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायणन ने सोमवार को लोगों से जनगणना करने वालों को सही जानकारी देने की अपील करते हुए आश्वस्त किया कि व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहेगा तथा इसे किसी साक्ष्य या किसी योजना का लाभ लेने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत सभी व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रहती है। उन्होंने कहा, "जनगणना के दौरान एकत्र किया गया सभी व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहता है। इसे सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत साझा नहीं किया जा सकता, न ही अदालत में साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सकता है और न ही किसी सरकारी या निजी संस्था के साथ साझा किया जा सकता है।" उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय डेटा का उपयोग केवल संकलन के लिए किया जाएगा।
जनगणना 2027 में क्या जाति की गणना होगी?
जाति को जनगणना में शामिल करने और लोगों द्वारा सही जानकारी नहीं दिए जाने की आशंका के बारे में पूछे जाने पर महापंजीयक ने कहा कि जाति से संबंधित डेटा दूसरे चरण में एकत्र किया जाएगा और इसके प्रश्न व्यापक चर्चा के बाद तय किए जाएंगे।
जनगणना के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
नारायण ने बताया कि पहली बार स्व-गणना की व्यवस्था शुरू की गई है, जिसमें लोग जनगणना के पहले चरण (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना) से पहले 15 दिनों की अवधि में डिजिटल रूप से अपनी जानकारी जमा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "पहले डेटा कागज पर एकत्र किया जाता था, जिससे डिजिटलीकरण में काफी समय लगता था। अब शुरुआत से ही डिजिटल डेटा मिलेगा, इसलिए हम बहुत जल्दी डेटा जारी कर सकेंगे। कई डेटा सेट 2027 में ही प्रकाशित किए जाएंगे।" नारायण ने कहा कि यह सुविधा केवल देश में रहने वाले लोगों के लिए उपलब्ध होगी, विदेश में रहने वालों के लिए नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान किसी भी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी।
जनगणना के लिए डेटा कैसे होगा एकत्र?
आयुक्त ने यह भी बताया कि डेटा मोबाइल ऐप के माध्यम से एकत्र किया जाएगा, और एक वेब पोर्टल जनगणना और हाउस लिस्टिंग की विभिन्न गतिविधियों की निगरानी व प्रबंधन करेगा। डेटा की सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डेटा सेंटरों को ’क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के अद्यतन को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है और इसका चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से कोई संबंध नहीं है।
