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मणिपुर में खून के एक-एक कतरे का हिसाब करेगी CBI, डीआईजी रैंक की दो महिला अफसर समेत उतारे 53 अधिकारी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 17, 2023, 08:51 AM IST

Manipur Violence: मणिपुर में हिंसा और महिलाओं के साथ अमानवीय अपराधों के सिलसिले में 6500 से अधिक FIR दर्ज की गई है। इसमें से 11 संगीन मामलों की जांच का जिम्मा सीबीआई को दिया गया है। सीबीआई ने जांच के लिए 53 अधिकारियों को कमान सौंपी है। इसमें 29 महिला अधिकारी भी शामिल हैं।

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मणिपुर हिंसा

Photo : BCCL

Manipur Violence: मणिपुर में बीते तीन महीनों से हिंसा का दौर जारी है। यहां सैकड़ों जानें जा चुकी हैं और हजारों घर जलाए गए हैं। हिंसा को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है तो वहीं खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद और लाल किले से मणिपुर में शांति की अपील कर चुके हैं। इस बीच अब मणिपुर में हर एक हिंसा का हिसाब करने के लिए सीबीआई को उतारा गया है।

सीबीआई जांच के दायरे में आए 11 मामलों में सीबीआई ने डीआईजी स्तर के तीन अधिकारियों के साथ 53 अधिकारियों को जांच की की कमान सौंपी है। इसमें दो महिला डीआईजी रैंक की अधिकारी समेत 29 महिला अधिकारी भी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI को सौंपी गई जांच

मणिपुर में हिंसा और महिलाओं के साथ अमानवीय अपराधों के सिलसिले में 6500 से अधिक FIR दर्ज की गई है। इसमें से 11 संगीन मामलों की जांच का जिम्मा सीबीआई को दिया गया है। दरअसल, केंद्र और मणिपुर सरकार ने इन मामलों को मणिपुर पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपने की बात सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार कर ली थी। बता दें, मणिपुर में हुई जातीय हिंसा में अब तक 160 से अधिक लोगों की जान गई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। वहीं हजारों घरों को जलाया गया है।

प्रधानमंत्री ने लाल किले से किया था मणिपुर का जिक्र

बता दें, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से मणिपुर हिंसा का जिक्र किया था। ध्वजारोहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि पिछले दिनों मणिपुर में हिंसा का दौर चला। मां-बेटियों के सम्मान के साथ खिलवाड़ हुआ, लेकिन आज वहां स्थिति सामान्य हो रही है। शांति लौट रही है। उन्होंने कहा, केंद्र और राज्य सरकारें शांति बहाली के लिए काम कर रही हैं। देश मणिपुर के लोगों के साथ है। मणिपुर में शांति से ही समाधान का रास्ता निकलेगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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