'बाबरी' की तर्ज पर मुर्शिदाबाद में मस्जिद निर्माण पर रोक से हाईकोर्ट का इनकार; कहा- हिंसा हुई तो ममता सरकार...
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Dec 5, 2025, 11:15 PM IST
अयोध्या में ढहा दी गई बाबरी मस्जिद की तर्ज पर हुमायूं कबीर द्वारा प्रस्तावित मस्जिद के निर्माण में हस्तक्षेप करने से कलकत्ता हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। गुरुवार को दायर जनहित याचिका में इस आधार पर आयोजन पर रोक लगाने की अपील की गई थी कि इससे क्षेत्र में सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ सकता है।
कलकत्ता हाईकोर्ट। फोटो- PTI
मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर हुमायूं कबीर द्वारा प्रस्तावित मस्जिद के निर्माण में हस्तक्षेप करने से कलकत्ता हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी छह दिसंबर को प्रस्तावित 'बाबरी मस्जिद' के लिए निर्धारित शिलान्यास समारोह से पहले आई है। बता दें कि हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद के निर्माण का एलान करने के बाद से बंगाल में सियासी माहौल गर्मा गया है। इससे पहले, टीएमसी ने गुरुवार को भरतपुर के अपने विधायक हुमायूं कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया था।
सुजॉय पॉल की खंडपीठ ने ममता सरकार को दिया आदेश
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की खंडपीठ ने प्रस्तावित मस्जिद के शिलान्यास समारोह पर रोक लगाने की अपील वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल सरकार की होगी।
गुरुवार को दायर जनहित याचिका में इस आधार पर आयोजन पर रोक लगाने की अपील की गई थी कि इससे क्षेत्र में सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ सकता है। साथ ही इसमें मांग की गई थी कि अदालत निलंबित टीएमसी विधायक की भड़काऊ टिप्पणियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें, जिन्होंने कथित तौर पर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ा है।
आदेश पर क्या बोले याचिकाकर्ता के वकील
वहीं, आदेश पर याचिकाकर्ता के वकील सब्यसाची मुखर्जी ने कहा कि अदालत ने यह सुनिश्चित किया है कि यदि प्रस्तावित आयोजन के दौरान कानून और व्यवस्था नियंत्रण से बाहर हो जाती है तो राज्य को जिम्मेदारी निभानी होगी। हमने केवल इस कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में शांति भंग होने की आशंका व्यक्त की है। हम कभी किसी को अपनी आस्था का पालन करने से नहीं रोकना चाहते थे। अब राज्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई गड़बड़ी न हो।
हुमायूं कबीर बोले- यह सत्य की जीत
वहीं, अदालत के आदेश को हुमांयू कबीर ने सत्य की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर अदालत के फैसले ने साबित कर दिया है कि वह सही रास्ते पर हैं। अदालत ने सही कहा है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना राज्य का कर्तव्य है। इस क्षेत्र में कई पुलिस थाने हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संख्या में पुलिस है कि कानून और व्यवस्था का उल्लंघन न हो। समारोह के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए हमारे पास 2000 स्वयंसेवक भी होंगे।
पार्टी से निलंबित कर चुकी है टीएमसी
दरअसल कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद का निर्माण करने की बात कही थी। इस पर विवाद बढ़ता देख टीएमसी ने अपने इस विधायक से गुरुवार को किनारा कर लिया। टीएमसी ने गुरुवार को कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर कबीर को निलंबित किया गया है। टीएमसी की अनुशासन समिति ने कहा कि पार्टी का अब उनसे कोई नाता नहीं है। इससे पहले टीएमसी ने इस मामले में उन्हें तीन बार सतर्क किया था लेकिन वह अपनी बयानबाजी से बाज नहीं आ रहे थे।
चढ़ा हुआ है बंगाल का सियासी पारा
टीएमसी के बागी विधायक कबीर ने बुधवार को यह कहकर सियासी पारा चढ़ा दिया कि वह राजभवन की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए छह दिसंबर को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद के शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य प्रशासन द्वारा उन्हें रोकने के किसी भी प्रयास का व्यापक विरोध होगा। कबीर का कई महीनों से सत्तारूढ़ पार्टी और अधिकारियों के साथ टकराव जारी है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि उनका कार्यक्रम ‘संवैधानिक अधिकारों के तहत’ आगे बढ़ेगा और इसमें ‘लाखों’ लोग शामिल हो सकते हैं।
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