देश

मायावती ने अग्निवीर योजना पर उठाए सवाल, कहा- अल्पकालीन भर्ती को लेकर चिंता बरकरार

Agniveer Scheme: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अग्निवीर योजना को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार महंगाई, गरीबी व बेरोजगारी आदि जैसी राष्ट्रीय समस्याओं की तरह इस मामले में भी केवल इधर-उधर की बात कर रही है।

Image

Mayawati

Photo : ANI

Agniveer Scheme: अग्निवीर योजना पर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। अब इस पर उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम और बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सेना में अल्पकालीन भर्ती को लेकर लोगों में चिंता बरकरार है। उन्होंने अग्निवीर योजना को लेकर एक्स पर पोस्ट भी किया है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट किया, सेना में अग्निवीर के रूप में अल्पकालीन व अस्थाई भर्ती का मामला जन व देशहित से जुड़ा ऐसा मुद्दा है जिस पर लोगों की चिंताएं बरकरार हैं। किन्तु सरकार महंगाई, गरीबी व बेरोजगारी आदि जैसी राष्ट्रीय समस्याओं की तरह इस मामले में भी केवल इधर-उधर की बात कर रही है, जो क्या उचित है?"

सेना में भर्ती सिर्फ नौकरी नहीं सम्मान से जुड़ा मामला

मायावती ने एक और पोस्ट में कहा, पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण देने की तैयारी में केंद्रीय सुरक्षा बल; यह मीडिया में नया सरकारी बयान है, किन्तु यह ऐसी नई बात नहीं है जो पहले नहीं कही गयी जिसे लोगों ने स्वीकार कर लिया हो। सेना में भर्ती सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि जज़्बा/सम्मान से जुड़ा है जिसपर सरकार जरूर ध्यान दे। बता दें, इससे पहले कांग्रेस नेता भी अग्निवीर योजना को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं।

संसद में भी उठा था अग्निवीर का मुद्दा

ज्ञात हो कि संसद में उठे अग्निवीर मुद्दे के बाद यह मसला लगातार चर्चा में बना हुआ है। इसी बीच अग्निवीरों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। भारत सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों की भर्ती में 10 फीसदी सीटें आरक्षित करने का फैसला लिया है। इनमें केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) जैसे सुरक्षाबलों में होने वाली भर्तियां शामिल हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article