Mann Ki Baat: मन की बात में बोले PM: छोटे-छोटे प्रयासों से कभी कभी तो बहुत बड़े-बड़े परिवर्तन आते हैं
PM Modi Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विश्व नदी दिवस का जिक्र किया औऱ जल संरक्षण पर ध्यान देने की अपील की। इस दौरान प्रधानमंत्री कई महत्वपूर्ण मुद्दों का जिक्र किया और हर्बल उत्पादों को लेकर भी लोगों से खास अपील की।
PM Modi Mann Ki Baat : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देश के संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि COVID-19 ने हर देशवासी को बहुत कुछ सिखाया है। प्रधानमंत्री ने लोगों से त्योहारों के मौसम के लिए खादी, हैंडलूम, कुटीर उद्योग से जुड़ी आपकी हर खरीदारी ‘Vocal For Local’ इस अभियान को मजबूत करने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे लिए नदी भौतिक वस्तु नहीं है, बल्कि एक जीवित ईकाई है। इसलिए तो हम नदियों को मां कहते हैं इनका संरक्षण करना जरूरी है। इसके अलावा पीएम ने और क्या कहा उसकी हर अपडेट हम आपको यहां दे रहे हैं-
देशवासियों को दी त्यौहारों की शुभकामनाएं
जैसा हम बात भी कर रहे थे, आने वाला समय त्यौहारों का है | पूरा देश मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की असत्य पर विजय का पर्व भी मनाने वाला है। लेकिन इस उत्सव में हमें एक और लड़ाई के बारे में याद रखना है - वो है देश की कोरोना से लड़ाई। टीम इंडिया इस लड़ाई में रोज नए रिकॉर्ड बना रही है। Vaccination में देश ने कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। इस लड़ाई में हर भारतवासी की अहम भूमिका है। हमें अपनी बारी आने पर Vaccine तो लगवानी ही है पर इस बात का भी ध्यान रखना है कि कोई इस सुरक्षा चक्र से छूट ना जाए। अपने आस-पास जिसे Vaccine नहीं लगी है उसे भी Vaccine centre तक ले जाना है | Vaccine लगने के बाद भी जरुरी protocol का पालन करना है | मुझे उम्मीद है इस लड़ाई में एक बार फिर टीम इंडिया अपना परचम लहराएगी। हम अगली बार कुछ और विषयों पर ‘मन की बात’ करेंगे। आप सभी को, हर देशवासी को, त्यौहारों की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ - पीएम मोदी
पंडित दीनदयाल उपाध्याय थे महान विचारक- पीएम मोदी
बिलाल अहमद के प्रयोग की तारीफ
साथियो, पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर, खेती में हो रहे नए प्रयोग, नए विकल्प, लगातार, स्वरोजगार के नए साधन बना रहे हैं | पुलवामा के दो भाइयों की कहानी भी इसी का एक उदाहरण है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में बिलाल अहमद शेख और मुनीर अहमद शेख ने जिस प्रकार अपने लिए नए रास्ते तलाशे, वो New India की एक मिसाल है। 39 साल के बिलाल अहमद जी Highly Qualified हैं, उन्होंने कई डिग्रियां हासिल कर रखी हैं। अपनी उच्च शिक्षा से जुड़े अनुभवों का इस्तेमाल आज वो कृषि में खुद का Start-up बनाकर कर रहे हैं | बिलाल जी ने अपने घर पर ही Vermi composting की Unit लगाई है। इस Unit से तैयार होने वाले बायो फर्टिलाइजर से न केवल खेती में काफी लाभ हुआ है, बल्कि यह लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी लेकर आया है | हर साल इन भाइयों की यूनिट से किसानों को करीब तीन हजार क्विंटल Vermi compost मिल रहा है- पीएम मोदी
युवाओं से की हर्बल उत्पादों को लेकर अहम अपील
साथियो, आज के हालात में जिस प्रकार Medicinal Plant और हर्बल उत्पादों को लेकर दुनिया भर में लोगों का रुझान बढ़ा है, उसमें भारत के पास अपार संभावनाएं हैं | बीते समय में आयुर्वेदिक और हर्बल product के export में भी काफी वृद्धि देखने को मिली है। मैं Scientists, Researchers और Start-up की दुनिया से जुड़े लोगों से, ऐसे Products की ओर ध्यान देने का आग्रह करता हूं, जो लोगों की Wellness और Immunity तो बढाए हीं, हमारे किसानों और नौजवानों की आय को भी बढ़ाने में मददगार साबित हो
प्रोफेसर आयुष्मान का किया जिक्र
पीएम बोले- COVID-19 ने हर देशवासी को बहुत कुछ सिखाया है
मेरे प्यारे देशवासियो, आज हम लोगों की ज़िन्दगी का हाल ये है कि एक दिन में सैकड़ों बार कोरोना शब्द हमारे कान पर गूंजता है, सौ साल में आई सबसे बड़ी वैश्विक महामारी, COVID-19 ने हर देशवासी को बहुत कुछ सिखाया है। Healthcare और Wellness को लेकर आज जिज्ञासा भी बढ़ी है और जागरूकता भी। हमारे देश में पारंपरिक रूप से ऐसे Natural Products प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं जो Wellness यानि सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। ओडिशा के कालाहांडी के नांदोल में रहने वाले पतायत साहू जी इस क्षेत्र में बरसों से एक अनोखा कार्य कर रहे हैं | उन्होंने डेढ़ एकड़ जमीन पर Medicinal Plant लगाए हैं | यही नहीं, साहू जी ने इन Medicinal Plants को Documentation भी किया है। ओड़िसा के पतायत साहू जी हों या फिर देवरी में महिलाओं की ये team, इन्होंने खेती को जिस प्रकार स्वास्थ्य के क्षेत्र से जोड़ा है, वो एक अपने आप में एक मिसाल है। आज इस कार्य में करीब चालीस महिलाओं की team जुटी है | और कई एकड़ में एलो वेरा की खेती होती है- पीएम मोदी
One Teacher, One Call का किया जिक्र
लोगों से किया खादी को अपनाने का आग्रह
आज आज़ादी के 75वें साल में हम जब आज़ादी के अमृत महोत्सव को मना रहे हैं, आज हम संतोष से कह सकते हैं कि आज़ादी के आंदोलन में जो गौरव खादी को था आज हमारी युवा पीढ़ी खादी को वो गौरव दे रही है। आज खादी और हैंडलूम का उत्पादन कई गुना बढ़ा है और उसकी मांग भी बढ़ी है।आप भी जानते हैं ऐसे कई अवसर आये हैं जब दिल्ली के खादी शोरूम में एक दिन में एक करोड़ रूपए से ज्यादा का कारोबार हुआ है। मैं भी फिर से आपको याद दिलाना चाहूँगा कि 2 अक्टूबर, पूज्य बापू की जन्म-जयंती पर हम सब फिर से एक बार एक नया record बनाए। दिवाली का त्योहार सामने है, त्योहारों के मौसम के लिए खादी, हैंडलूम, कुटीर उद्योग से जुड़ी आपकी हर खरीदारी ‘Vocal For Local’ इस अभियान को मजबूत करने वाली हो, पुराने सारे record तोड़ने वाली हो।
डिजिटल लेन- देन का किया जिक्र
अब आप जानते हैं जनधन खातों को लेकर देश ने जो अभियान शुरू किया | इसकी वजह से आज गरीबों को उनके हक का पैसा सीधा, सीधा उनके खाते में जा रहा है जिसके कारण भ्रष्टाचार जैसे रुकावटों में बहुत बड़ी मात्रा में कमी आई है। ये बात सही है आर्थिक स्वच्छता में technology बहुत मदद कर सकती है | हमारे लिए ख़ुशी की बात है आज गाँव देहात में भी fin-tech UPI से डिजिटल लेन-देन करने की दिशा में सामान्य मानवी भी जुड़ रहा है, उसका प्रचलन बढ़ने लगा है। आपको मैं एक आंकड़ा बताता हूँ आपको गर्व होगा, पिछले अगस्त महीने में, एक महीने में UPI से 355 करोड़ transaction हुए, यानि करीब-करीब 350 करोड़ से ज्यादा transaction। आज average 6 लाख करोड़ रूपये से ज्यादा का डिजिटल पेमेंट UPI से हो रहा है | इससे देश की अर्थव्यवस्था में स्वच्छता, पारदर्शिता आ रही है और हम जानते है अब fin-tech का महत्व बहुत बढ़ रहा है- पीएम मोदी
गांधी जी ने स्वच्छता को स्वाधीनता के सपने के साथ जोड़ दिया था- पीएम मोदी
ये महात्मा गांधी ही तो थे, जिन्होंने स्वच्छता को जन-आन्दोलन बनाने का काम किया था। महात्मा गाँधी ने स्वच्छता को स्वाधीनता के सपने के साथ जोड़ दिया था। आज इतने दशकों बाद, स्वच्छता आन्दोलन ने एक बार फिर देश को नए भारत के सपने के साथ जोड़ने का काम किया है। और ये हमारी आदतों को बदलने का भी अभियान बन रहा है। स्वच्छता ये पीढ़ी दर पीढ़ी संस्कार संक्रमण की एक जिम्मेवारी है और पीढ़ी दर पीढ़ी स्वच्छता का अभियान चलता है, तब सम्पूर्ण समाज जीवन में स्वच्छता का स्वभाव बनता है। ये साल-दो साल, एक सरकार-दूसरी सरकार ऐसा विषय नहीं है पीढ़ी दर पीढ़ी हमें स्वच्छता के संबंध में सजगता से अविरत रूप से बिना थके बिना रुके बड़ी श्रद्धा के साथ जुड़े रहना है और स्वच्छता के अभियान को चलाए रखना है।और मैंने तो पहले भी कहा था, कि स्वच्छता ये पूज्य बापू को इस देश की बहुत बड़ी श्रद्धांजलि है और ये श्रद्धांजलि हमें हर बार देते रहना है, लगातार देते रहना है : पीएम मोदी
कभी भी छोटी बात को छोटी चीज़ को, छोटी मानने की गलती नहीं करनी चाहिए- पीएम
साबरमती नदी की सफाई का पीएम ने किया जिक्र
आप में से बहुत लोग जानते होंगे कि जिस साबरमती के तट पर महात्मा गाँधी ने साबरमती आश्रम बनाया था पिछले कुछ दशकों में ये साबरमती नदी सूख गयी थी। साल में 6-8 महीने पानी नजर ही नहीं आता था, लेकिन नर्मदा नदी और साबरमती नदी को जोड़ दिया, तो अगर आज आप अहमदाबाद जाओगे तो साबरमती नदी का पानी ऐसा मन को प्रफुल्लित करता है। इसी तरह बहुत सारे काम जैसे तमिलनाडु की हमारी ये बहनें कर रही हैं देश के अलग अलग कोने में चल रहे हैं। कई नदियों के किनारे पेड़ लगाने का अभियान चला रहे हैं | तो कहीं नदियों में बह रहे गंदे पानी को रोका जा रहा है। मैं तो जानता हूँ कई हमारे धार्मिक परम्परा से जुड़े हुए संत हैं, गुरुजन हैं, वे भी अपनी अध्यात्मिक यात्रा के साथ-साथ पानी के लिए नदी के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं। लेकिन हर नदी के पास रहने वाले लोगों को, देशवाशियों को मैं आग्रह करूँगा कि भारत में, कोने-कोने में साल में एक बार तो नदी उत्सव मनाना ही चाहिए। साथियो, ‘वर्ल्ड रिवर डे’ जब आज मना रहे हैं तो इस काम से समर्पित सबकी मैं सराहना करता हूँ, अभिनन्दन करता हूँ : पीएम मोदी
तमिलनाडु के वेल्लोर और तिरुवन्नामलाई जिले का दिया उदाहरण
नदियाँ अपना जल खुद नहीं पीती, बल्कि परोपकार के लिये देती हैं- पीएम मोदी
हमारे यहाँ कहा गया है –“पिबन्ति नद्यः, स्वय-मेव नाम्भः अर्थात् नदियाँ अपना जल खुद नहीं पीती, बल्कि परोपकार के लिये देती हैं। हमारे लिये नदियाँ एक भौतिक वस्तु नहीं है, हमारे लिए नदी एक जीवंत इकाई है, और तभी तो, तभी तो हम, नदियों को माँ कहते हैं। आप सब जानते ही हैं – माघ का महीना आता है तो हमारे देश में बहुत लोग पूरे एक महीने माँ गंगा या किसी और नदी के किनारे कल्पवास करते हैं। नदियों का स्मरण करने की परंपरा आज भले लुप्त हो गई हो या कहीं बहुत अल्पमात्रा में बची हो लेकिन एक बहुत बड़ी परंपरा थी जो प्रातः में ही स्नान करते समय ही विशाल भारत की एक यात्रा करा देती थी, मानसिक यात्रा! देश के कोने-कोने से जुड़ने की प्रेरणा बन जाती थी। और वो क्या था भारत में स्नान करते समय एक श्लोक बोलने की परंपरा रही है- गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति | नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिं कुरु : पीएम मोदी
पीएम मोदी ने किया- विश्व नदी दिवस का किया जिक्र
मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार ! आप जानते हैं कि एक जरुरी कार्यक्रम के लिए मुझे अमेरिका जाना पड़ रहा है तो मैंने सोचा कि अच्छा होगा कि अमेरिका जाने से पहले ही मैं ‘मन की बात’ रिकॉर्ड कर दूँ। सितम्बर में जिस दिन ‘मन की बात’ है, उसी तारीख को एक और महत्वपूर्ण दिन होता है। लेकिन एक और Day ऐसा है जो हम सबको याद रखना चाहिए और ये day ऐसा है जो भारत की परम्पराओं से बहुत सुसंगत है | सदियों से जिस परम्पराओं से हम जुड़े हैं उससे जोड़ने वाला है।
ये है ‘वर्ल्ड रिवर डे’ यानी ‘विश्व नदी दिवस- PM
मांगे थे लोगों से सुझाव
इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम के 81वें एडिशन के लिए देश के आम नागरिकों से इनपुट और सुझाव मांगे थे। प्रधानमंत्री ने अपने ट्विटर हैंडल पर MyGov पोर्टल का लिंक शेयर करते हुए लिखा कि इस महीने के मन की बात के लिए कई दिलचस्प इनपुट मिल रहे हैं, जो 26 तारीख को होगा।
मन की बात की 81वीं कड़ी
मन की बात कार्यक्रम की यह 81वीं कड़ी है। यह कार्यक्रम हर महीने के आखिरी रविवार को प्रसारित होता है। इस बार मन की बात कार्यक्रम ऐसे समय में होगा जब प्रधान मंत्री, संयुक्त राज्य अमेरिका की अपनी आधिकारिक तीन दिवसीय यात्रा समाप्त की है। इस दौरान प्रधानमंत्री कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय रख सकते हैं।
आज ही अमेरिका से लौट रहे हैं प्रधानमंत्री
आपको बता दें कि अपनी चार दिवसीय यात्रा के बाद आज पीएम मोदी स्वदेश लौट रहे हैं। ऐसे में लोगों की नजर मन की बात पर होगी कि आखिर पीएम इस बार क्या कहते हैं। अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका संबंध और भी मजबूत होंगे।


