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दिल्ली जल संकट: बीजेपी ने केजरीवाल सरकार के खिलाफ मोर्चा, जल बोर्ड ऑफिस का किया घेराव

Delhi Water Crisis: ​बीते दिनों बीजेपी ने दिल्ली जल बोर्ड पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। बीजेपी का कहना था कि दिल्ली सरकार के संरक्षण में जल बोर्ड में घोटाला हुआ है। जनता के हितों को ताक पर रखते हुए निजी टैंकर माफियाओं को आर्थिक मोर्चे पर दिल्ली सरकार फायदा पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

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दिल्ली जल बोर्ड ऑफिस के सामने बीजेपी ने किया प्रदर्शन।

Photo : ANI

Delhi Water Crisis: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पानी संकट को लेकर सियासत और तेज हो गई है। एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी की मंत्री आतिशी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठी हैं, वहीं अब बीजेपी नेता रमेश बिधूड़ी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने केजरीवाल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

बीजेपी नेता रमेश बिधूड़ी के नेतृत्व में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने शनिवार को पानी संकट को लेकर दिल्ली जल बोर्ड के दफ्तर का घेराव करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान बीजेपी के कई नेताओं की पुलिस के साथ झड़प भी हुई। यही नहीं, पुलिस ने इस दौरान कई कार्यकर्ताओं को वाटर कैनन के जरिए रोकने का प्रयास भी किया।

आप सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप

बीजेपी नेताओं का कहना है कि केजरीवाल सरकार निकम्मी है। सरकार के कुप्रबंधन की वजह से दिल्ली के लोगों को पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी का कहना है कि केजरीवाल सरकार के निकम्मेपन की वजह से दिल्ली के लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। केजरीवाल सरकार को पता था कि हर साल गर्मी का मौसम आते ही दिल्ली में पानी की किल्लत होती है।

सरकार ने नहीं तैयार किया समर एक्शन प्लान

बीजेपी नेताओं ने कहा, हर साल जल संकट से निपटने के लिए ‘समर एक्शन प्लान’ तैयार किया जाता है, लेकिन इस बार सरकार ने इस तरह का ऐसा कोई भी प्लान तैयार नहीं किया। पूरे साल सरकार शराब घोटाले के नाम पर राजनीति करती रही, जिससे स्पष्ट है कि इस सरकार को जनता के हितों से कोई लेना-देना नहीं है। आलम यह है कि दिल्ली के लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने कहा, दिल्ली सरकार अपनी गलती स्वीकार करने की जगह हरियाणा पर पानी ना देने का आरोप लगा रही है, जबकि सच्चाई यह है कि हरियाणा की ओर से दिल्ली के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी दिया जा रहा है। मगर दिल्ली सरकार वाटर टैंकर माफिया को पानी उपलब्ध करवा रही है। ऐसा कर वो अपने लिए आर्थिक मुनाफा प्राप्त कर रही है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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