Punjab Elections 2027: पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक्टिव हो गई है। भाजपा सांसद राघव चड्ढा ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। अचानक हुई इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में अटकलें तेज हो गईं। राघव चड्ढा ने पीएम मोदी से ऐसे समय मुलाकात की जब एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री से शिरोमणि अकाली दल (SAD) के मुखिया सुखबीर सिंह बादल मिले थे।
PM मोदी ने मिले चड्ढा
राघव चड्ढा ने पीएम मोदी के साथ मुलाकात को 'यादगार' बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पीएम मोदी के साथ मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। हालांकि, पीएम मोदी के साथ क्या बातचीत हुई? इसके बारे में राघव चड्ढा ने जानकारी साझा नहीं की, लेकिन उनके साथ बातचीत को ज्ञानवर्धक करार दिया। राघव चड्ढा की भाजपा में एंट्री के बाद सियासी समीकरण बदलने लगे हैं। वह अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी छोड़कर छह सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हुए थे और अब पार्टी को मजबूत करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
पीएम मोदी से मिलने के बाद चड्ढा ने कहा, ''यह सुबह मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगी। प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का सौभाग्य मिला। उनके साथ विस्तृत और ज्ञानवर्धक बातचीत हुई। अपना बहुमूल्य समय देने और उनके अनुभव एवं मार्गदर्शन से लाभ उठाने का अवसर प्रदान करने के लिए मैं हृदय से आभारी हूं। इस दौरान, उन्होंने पीएम मोदी को भगवान गणेश की मूर्ति भेंट की।
ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी के बाद फिर मिले चड्ढा
इससे पहले, पीएम मोदी ने भाजपा में शामिल हुए नए नेताओं और नवनिर्वाचित सदस्यों को ब्रेकफॉस्ट में बुलाया था, जहां पर पीएम मोदी से चड्ढा मिले थे। इस दौरान, पीएम मोदी ने सांसदों से रोजाना कम से कम एक से दो घंटे संसद की लाइब्रेरी में अध्ययन करने की अपील की थी।
इसके बाद, अब चड्ढा के अलग से पीएम मोदी से मिलने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब भाजपा ने पंजाब में अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज की हैं। चड्ढा राज्यसभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं और वह आम आदमी पार्टी की कार्यप्रणाली से वाकिफ हैं और उनके भाजपा में जाने को आम आदमी पार्टी के लिए रणनीतिक नुकसान के तौर पर भी देखा जा रहा था। ऐसे में भाजपा उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंप सकती है।
इतना ही नहीं, भाजपा कोशिश कर सकती है कि चड्ढा के जरिए वह आम आदमी पार्टी के वोट बैंक में सेंधमारी कर सके। भाजपा उन्हें ऐसे नेता के तौर पर पेश कर सकती है, जो आम आदमी पार्टी से निकला है और अब AAP की नीतियों की आलोचना कर रहा है। इससे खासतौर पर उन मतदाताओं को लुभाया जा सकता है, जिन्होंने 2022 में आम आदमी पार्टी का साथ दिया था।
सुखबीर से भी बढ़ा रही नजदीकियां
जब भाजपा का शिअद के साथ गठबंधन था तो पार्टी की पंजाब में स्थिति काफी मजबूत मानी जाती थी, लेकिन कृषि कानूनों के चलते सुखबीर सिंह बादल ने भाजपा से दूरियां बना लीं और एनडीए गठबंधन से खुद को अलग कर लिया था। हालांकि, बाद में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया था।
मौजूदा समय में सुखबीर सिंह बादल की पीएम मोदी से मुलाकात को दूरियां मिटाने वाली मुलाकात के तौर पर देखा जा रहा है और कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी चुनाव में पुराने साथी शायद एकजुट हो सकते हैं।
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महिला आरक्षण बिल पर भाजपा के साथ आई शिअद
शिअद ने भाजपा से महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग की। शिअद ने कहा कि सिख गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए अकाली दल महिलाओं की गरिमा, समानता और समान अधिकारों का हमेशा समर्थन करता रहा है।
शिअद की चंडीगढ़ में एक बैठक हुई जिसके बाद पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि संसद के समक्ष मौजूद महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के बाद शिअद ने निष्पक्ष और संतुलित परिसीमन की भी मांग की। पार्टी ने कहा कि परिसीमन ऐसा होना चाहिए, जिससे सभी राज्यों को समान और उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। शिअद ने केंद्र सरकार की ओर से सदन में सभी राज्यों की सीटों में 50 फीसदी की समान वृद्धि के प्रस्ताव का समर्थन किया।
