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'आतंकवादियों की पार्टी है भाजपा', ये क्या बोल गए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे

BJP vs Congress: भारतीय जनता पार्टी के बारे में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे एक विवादित टिप्पणी कर दी है। उन्होंने दावा किया है कि भाजपा 'आतंकवादियों की पार्टी' है। आखिर खड़गे ने ये बात कहां बोली, उन्होंने ऐसा क्यों कहा? इन सवालों के अलावा ये बात जाहिर है कि इस बयान पर सियासी बवाल खड़ा होना लाजमी है।

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे।

Photo : PTI

Mallikarjun Kharge Controversial Statement: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनकी पार्टी को 'अर्बन नक्सल गिरोह' द्वारा चलाये जाने संबंधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया टिप्पणी को लेकर उन पर पलटवार करते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 'आतंकवादियों की पार्टी' है। खड़गे ने आरोप लगाया कि वे ‘लिंचिंग’ करते हैं और लोगों को पीटते हैं तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) समुदायों के लोगों पर अत्याचार करते हैं।

खड़गे के आरोप पर भाजपा ने दे दी खुली चुनौती

कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए भाजपा की कर्नाटक इकाई के वरिष्ठ नेता और विधानपरिषद सदस्य (एमएलएसी) एन रविकुमार ने कहा कि देश में आतंकवाद और नक्सली गतिविधियों में करीब 80-90 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने इस विषय पर सर्वेक्षण और बहस कराने की चुनौती दी कि- आतंकियों का समर्थक कौन है?

रविकुमार ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के 10 साल की तुलना मनमोहन सिंह के दस साल के शासनकाल से करते हुए यह बात कही। खड़गे ने मोदी की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर कहा, 'वह (मोदी) हमेशा से यह कहते रहे हैं। यहां तक कि वह अब भी यह कह रहे हैं। अब तक वह चुप बैठे थे, थोड़ा अब जान आने के बाद वह अर्बन नक्सल बोल रहे हैं। वह प्रबुद्ध और प्रगतिशील लोगों को अर्बन नक्सल बोल रहे हैं, वह कांग्रेस को भी ऐसा (अर्बन नक्सल) बोल रहे हैं। यह उनकी आदत है।'

आतंकवादियों की पार्टी है भाजपा- मल्लिकार्जुन खड़गे

कांग्रेस अध्यक्ष ने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, 'उनकी अपनी पार्टी (भाजपा) आतंकवादियों की पार्टी है, वे लिंचिंग, लोगों को मारने में शामिल हैं, अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों के मुंह में पेशाब करते हैं, आदिवासियों से बलात्कार करते हैं। उनकी पार्टी (भाजपा) आतंकवादियों की पार्टी है, वे इस तरह के कृत्य करने वाले लोगों का समर्थन करते हैं, और फिर दूसरों पर दोषारोपण करते हैं।'

उन्होंने कहा, 'मोदी को तो कोई हक नहीं है, जहां भी उनकी पार्टी की सरकार है, वहां अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों के लोगों पर, खास तौर पर आदिवासियों पर अत्याचार होते हैं। फिर वह (मोदी) कहते हैं कि अन्याय हो रहा है। क्या हुकूमत हमारी (कांग्रेस की) है? सरकार आपकी (भाजपा की) है, आप नियंत्रित कर सकते हैं। लेकिन मोदी की आदत है ऐसा बोलने की। वह देश और लोगों के बारे में कम, पार्टी के बारे में ज्यादा बोलते हैं।'

'कांग्रेस के पास आतंकवादियों पर कोई स्पष्ट नीति नहीं'

भाजपा नेता रविकुमार ने दावा किया कि कांग्रेस के पास नक्सलियों और आतंकवादियों पर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि वे (कांग्रेस) अप्रत्यक्ष रूप से एक विशेष समुदाय को खुश करने में लगे हुए हैं और इसके लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। उन्होंने कहा, 'यह खड़गे को खुली चुनौती है। हम बहस के लिए तैयार हैं। मोदी के शासनकाल के 10 वर्षों और केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के दस वर्षों के दौरान की आतंकी और नक्सली गतिविधियों की तुलना करें।'

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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