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चंडीगढ़ मेयर चुनाव की 'इनसाइड स्टोरी', बहुमत का आंकड़ा न होते हुए भी BJP ने मार ली बाजी

इसके पीछे एक बड़ी वजह बताई जा रही है। यह वजह है बीजेपी के चंडीगढ़ मेयर चुनाव प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का डर। तावड़े के डर की ये इनसाइड स्टोरी कांग्रेस के ही एक बड़े नेता ने नाम ना बताने की शर्त पर बताई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि मेयर पद पर जीत के लिए आम आदमीं पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन करीब करीब तय हो गया था।

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भाजपा ने जीता चंडीगढ़ का मेयर चुनाव।

Photo : PTI

Chandigarh Mayor Eection 2026 : चंडीगढ़ चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मेयर पद पर जीत हो गई। बहुमत का आंकड़ा ना होने के बाद भी बीजेपी ने मेयर पद पर कब्जा कर लिया। मेयर पद पर जीत के लिए 19 वोटों की जरूरत थी और बीजेपी के पास 18 वोट थे लेकिन इसके बावजूद भी बीजेपी ने बिना कोई क्रॉस वोटिंग कराए चुनाव जीत लिया। मेयर पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सौरभ जोशी ने आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवार योगेश ढींगरा को हराया। चुनाव में सौरभ को 18 वोट और ढींगरा को 11 वोट मिले जबकि कांग्रेस उम्मीदवार गुरप्रीत गोबी को सात वोट हासिल हुए।

तावड़े के प्रभारी बनते ही बदल गए समीकरण

इसके पीछे एक बड़ी वजह बताई जा रही है। यह वजह है बीजेपी के चंडीगढ़ मेयर चुनाव प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का डर। तावड़े के डर की ये इनसाइड स्टोरी कांग्रेस के ही एक बड़े नेता ने नाम ना बताने की शर्त पर बताई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि मेयर पद पर जीत के लिए आम आदमीं पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन करीब करीब तय हो गया था क्योंकि गठबंधन के हिसाब से चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त बहुमत हो जाता और आसानी से मेयर पद पर कब्जा गठबंधन प्रत्याशी का हो जाता लेकिन उस समय समीकरण और परिस्थितियां बदल गईं जब बीजेपी ने अपने राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को चंडीगढ़ मेयर चुनाव का प्रभारी बना दिया।

कांग्रेस ने AAP को निशाना साधने का मौका नहीं दिया

कांग्रेस नेता के मुताबिक कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बीजेपी की इस घोषणा के कुछ दिन बाद एक महत्वपूर्ण बैठक हुई और उस मीटिंग में ये राय सामने आई कि यदि गठबंधन में चुनाव लड़ते हैं तो तावड़े पार्टी के पार्षदों में सेंध लगा देंगे और फिर उसके बाद पार्टी की बहुत किरकिरी होगी। इससे आम आदमीं पार्टी को भी कांग्रेस पर निशाना साधने का अच्छा बहाना मिल जाएगा क्योंकि सेंध लगने की स्थिति में AAP कांग्रेस पर बीजेपी की 'बी टीम' होने का आरोप लगाती और इसका कोई जवाब कांग्रेस के पास नहीं होता।

कांग्रेस ने पहले ही हार मान ली

इसलिए तावड़े के डर से कांग्रेस ने फजीहत होने की जगह पहले ही हार मानना स्वीकार कर लिया और परिस्थितियों को देखते हुए आम आदमीं पार्टी से गठबंधन करने से इंकार कर दिया और अकेले चुनाव लड़ी। इसके बाद ज्यादा वोटों के दम पर बीजेपी ने आसानी से अपना मेयर बनवा लिया।

तावड़े के नेतृत्व में चंडीगढ़ मेयर पर यह भाजपा की लगातार 5 वीं जीत है।

Ravikant Rai
रविकांत रायauthor

सत्ता के गलियारों से आम जनमानस से जुड़ी हर ख़बर पर पैनी नज़र, । राजनीति के हर दांव पेंच से वाकिफ, 13 सालों में दो लोकसभा चुनाव और कई राज्यों के विधान सभा चुनाव कवर करने का अनुभव। संसद भवन, बीजेपी और प्रधानमंत्री कार्यालय को मैं कवर करता हूं... फिल्मे देखना , सपने देखना और उनका पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगा देना ये मेरा जुनून है।

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