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BJP और विपक्षी दलों पर भड़कीं मायावती, लगा दिए ये 4 गंभीर आरोप

UP Politics: मायावती ने दावा किया है कि विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस (INDIA) में शामिल दलों और भाजपा ने जनता का विश्वास खो दिया है। उन्होंने गरीबों, बेरोजगारों, महिलाओं, छोटे व्यापारियों का जिक्र करते हुए योगी सरकार पर भी तीखा प्रहार किया है। उन्होंने क्या कुछ कहा, इस रिपोर्ट में पढ़ें।

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मायावती, बसपा सुप्रीमो।

Mayawati Slams BJP and Opposition: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि उत्तर प्रदेश के लोगों का भाजपा और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के घटक दलों से विश्वास उठ गया है और उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे राज्य के आगामी उपचुनाव में इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराएं।

10 विधानसभा सीटों पर कब होंगे उपचुनाव?

मायावती ने बृहस्पतिवार को पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रदेश इकाई के सभी पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों की बैठक को संबोधित किया। पार्टी के एक बयान के अनुसार बैठक में राज्य के 10 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों की रणनीति पर चर्चा की गई। इन उपचुनावों की तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है।

भाजपा और विपक्षी दलों को सुनाई खरी-खोटी

मायावती ने कहा, 'जनहित और जनकल्याण आदि के ज्वलंत मुद्दों को उठाने के बजाय वे (भाजपा सरकार तथा विपक्षी दल) जातिवादी, साम्प्रदायिक और जाति-बिरादरी पर आधारित संकीर्ण राजनीति में लिप्त हैं, जिसके कारण जनता में उनके प्रति विश्वास में कमी आई है।' बसपा प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, 'इसलिए बसपा को बहुत तेजी से जनता के बीच अपनी पैठ बनाने की जरूरत है ताकि इसका लाभ जल्द ही 10 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में भी मिल सके।' बसपा ने हाल में हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीट पर अकेले चुनाव लड़ा था लेकिन उसका खाता भी नहीं खुला था। इसी तरह 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 423 सीट में से केवल एक सीट मिली थी।

'खोखले वादों के कारण जनता का जीवन त्रस्त'

बसपा भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) या ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल नहीं हुई है। ‘इंडिया’ के घटक दलों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) शामिल हैं। मायावती के हवाले से बयान में कहा गया है, 'उत्तर प्रदेश सरकार गरीबों, बेरोजगारों, महिलाओं, छोटे व्यापारियों और मेहनतकश नागरिकों को पर्याप्त राहत, सुविधाएं और सुरक्षा देने में विफल रही है। इनके खोखले वादों और दावों के कारण जनता का जीवन त्रस्त है।' उन्होंने कहा, 'चूंकि जनता अब इन खोखले वादों पर भरोसा नहीं करती, इसलिए भाजपा सरकार में जनता के विश्वास में भारी कमी आई है।'

महंगाई के मुद्दे पर क्या बोलीं बसपा सुप्रीमो मायावती?

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'यदि पार्टी के सदस्य जमीनी स्तर पर पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करते रहेंगे तो बसपा को इस मौजूदा स्थिति से काफी लाभ मिल सकता है।' इस बैठक के दौरान 11 अगस्त को आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी संगठन को मजबूत करने तथा समाज के सभी वर्गों में जनाधार बढ़ाने के लिए जारी किए गए महत्वपूर्ण निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट की भी समीक्षा की गई। मायावती ने कहा कि अत्यधिक गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ापन, मजबूरी में पलायन और जबरदस्त महंगाई जैसे मुद्दे ज्वलंत हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर महज आरोपों और दावों से उत्तर प्रदेश की लगभग 25 करोड़ जनता को न तो कोई फायदा हुआ है और न ही आगे कुछ बेहतर होने वाला है।

बुलडोजर को मायावती ने बनाया चिंता का कारण

उन्होंने कहा, 'स्थिति बिगड़ रही है और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।' 'बुलडोजर' मुद्दे और इसे रोकने के उच्चतम न्यायालय के हाल के आदेश पर, बसपा प्रमुख ने कहा कि यह बढ़ती प्रवृत्ति बहुत चिंता का कारण है और केंद्र तथा राज्य सरकारों दोनों को संवैधानिक और कानूनी शासन का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए। केंद्रीय मंत्रिमंडल के ‘एक देश, एक चुनाव’ प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि बसपा लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ कराने की पहल को सकारात्मक रूप से देखती है लेकिन इसका उद्देश्य देश और जनहित में होना जरूरी है।

यूपी की किन विधानसभा सीटों पर होना है उपचुनाव?

उत्तर प्रदेश की करहल, मिल्कीपुर, कटेहरी, कुंदरकी, गाजियाबाद, खैर मीरापुर, फूलपुर, मझवा और सीसामऊ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। हालांकि अभी उपचुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। सीसामऊ सीट सपा विधायक इरफान सोलंकी को अदालत द्वारा सजा सुनाये जाने के कारण उनकी सदस्यता रद्द होने पर रिक्त हुई है। बाकी सीट पर संबंधित विधायकों के लोकसभा के लिये चुने जाने के कारण उपचुनाव कराया जाना जरूरी हो गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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