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गलत नहीं थी बिहार की लड़की,67% लड़कियां पैड की जगह करती हैं कपड़े का यूज,IAS ने उड़ाया था मजाक

  • Agency by: Agency
  • Updated Sep 29, 2022, 03:25 PM IST

देश में 15-24 साल की उम्र की 50 फीसदी लड़कियां या महिलाएं अभी भी माहवारी के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। और जिस बिहार (Bihar) में हरजीत कौर नौकरी कर रही हैं, वहां पर 41 फीसदी महिलाएं स्वच्छ तरीकों का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं। जो कि पूरे देश में सबसे निचले पायदान पर है।

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महिला IAS अधिकारी का बेतुका बयान

KEY HIGHLIGHTS
  • जनऔषधि केंद्र से इस समय एक रुप में सेनेटरी पैड दिए जा रहे हैं।
  • आशा वर्कर्स से 6 रुपये में एक पैकेट सेनेटरी पैड लिए जा सकते है।
  • IAS अधिकारी को राष्ट्रीय महिला आयोग से नोटिस मिला।

Bihar Women IAS On Sanitary Pad :बिहार के महिला एवं बाल विकास निगम की एमडी हरजोत कौर बम्हरा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उनके जैसे वरिष्ठ महिला IAS अधिकारी द्वारा महिलाओं के बेहद संवेदनशील मुद्दे पर दिया गया गया बयान उनकी मुसीबत बना जा रहा है। पहले तो सोशल मीडिया पर उनके बयान की काफी आलोचना हुई और उसके बाद अब राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी उन्हें नोटिस जारी कर दिया है। असल में हरजोत कौर का जवाब ही कुछ ऐसा था, जिससे लगता है कि उन्हें जमीनी हकीकत का अंदाजा ही नही है। जिस सेनेटरी पैड (Sanitary Pad) को लेकर उन्होंने बयान दिया, वह न केवल अभी भी भारत में एक टैबू (Taboo) है, बल्कि उसका इस्तेमाल भी बेहद कम है। देश में 15-24 साल की उम्र की 50 फीसदी लड़कियां या महिलाएं अभी भी माहवारी के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। और जिस बिहार (Bihar) में हरजीत कौर नौकरी कर रही हैं, वहां पर 67 फीसदी महिलाएं कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। और 41 फीसदी महिलाएं स्वच्छ तरीकों का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं।

सेनेटरी पैड मुफ्त करने की मांगने पर दिया ये बयान

असल में सीनियर आईएएस अधिकारी हरजोत कौर बम्हरा ने यूनिसेफ द्वारा आयोजित 'सशक्त बेटी, समृद्ध बिहार' (Sashakt Beti, Samriddh Bihar) के क्लास 9 और क्लास 10 के स्टूडेंट्स के लिए एक कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा किए गए सवाल के जवाब से विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने छात्राओं से कहा था कि आज आप सेनेटरी पैड मुफ्त में मांग रही है (Sanitary pads)कल को परिवार नियोजन की बात आएगी तो निरोध भी (Condoms)भी मुफ्त देना पड़ेगा । इसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया। लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। इसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक कार्यक्रम में सैनिटरी नैपकिन का अनुरोध करने वाली एक स्कूली छात्रा का सार्वजनिक रूप से मजाक करने वाले और उस पर की गई टिप्पणी का संज्ञान लिया है। और हरजीत कौर से लिखित में जवाब मांगा है।

50 फीसदी लड़कियां कपड़े का करती हैं इस्तेमाल

शायद महिला अधिकारी ने इन आकड़ों पर गौर नहीं किया । क्योंकि अगर वह करती तो शायद इस तरह के बयान नहीं देती। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 15-24 साल की उम्र की करीब 50 फीसदी लड़कियां या महिलाएं अभी भी माहवारी के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। जबकि यदि किसी अस्वच्छ कपड़े का दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे कई तरह के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। NFHS-5 के सर्वे के अनुसार बिहार में केवल 59.2 फीसदी महिलाएं माहवारी के दौरान हाइजीन का ध्यान रख पाती हैं। जो कि पूरे देश में सबसे कम है। ऐसे में अगर वह लड़की IAS महोदया से मुफ्त में सेनेटरी पैड की मांग कर रही थी तो शायद वह इतना भी गलत नहीं था कि इसका मजाक बनाया जाय।

एक रूपये में मिलता है सेनेटरी पैड

देश में मौजूद 8600 (2021-22 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार संख्या) से ज्यादा जनऔषधि (Jan Aushadhi Kendra) केंद्र से इस समय एक रुप में सेनेटरी पैड दिए जा रहे हैं। इसके तहत ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सेनेटरी नैपकिन दी जा रही है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा जुलाई 2022 में लोक सभा में दी गई जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आशा वर्कर के जरिए 6 रुपये में सेनेटरी पैड का पैकेट दिया जा रहा है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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