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Kolkata: जहां महिला डॉक्टर से हुई दरिंदगी, उस अस्पताल की बढ़ी मुश्किलें; जांच के लिए बनी SIT

Kolkata: एक ओर कोलकाता में महिला डॉक्टर से रेप और हत्या की वारदात ने सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वहीं जिस ममता सरकार पर अपराध को लेकर सवाल खड़े हुए, उसी बंगाल सरकार ने आरजी कर अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए एसआईटी गठित की है।

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आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल

Financial Irregularities of RG Kar Hospital: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की उस महिला चिकित्सक को न्याय दिलाने की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसकी कथित तौर पर दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने कोलकाता के उस अस्पताल की मुश्किलें बढ़ा दी है।

डॉ. प्रणव कुमार करेंगे एसआईटी का नेतृत्व

पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इसी अस्पताल में बीते दिनों एक स्नातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक का शव बरामद हुआ था। चार सदस्यीय एसआईटी का नेतृत्व स्वामी विवेकानंद राज्य पुलिस अकादमी के महानिरीक्षक (आईजी) डॉ. प्रणव कुमार करेंगे।

एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

पश्चिम बंगाल गृह विभाग की ओर से 16 अगस्त को जारी अधिसूचना के अनुसार, एसआईटी को सरकारी विभागों और निजी एजेंसियों से जांच के लिए कोई भी प्रासंगिक दस्तावेज तक पहुंच की छूट होगी। विशेष सचिव ने हस्ताक्षरित अधिसूचना में कहा है, 'मुझे जनवरी 2021 से अब तक की अवधि के दौरान आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच करने के लिए एक एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया गया है।' एसआईटी को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

चार सदस्यीय एसआईटी में कौन-कौन?

जांच के दौरान कुमार को मुर्शिदाबाद रेंज के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) वकार रजा, राज्य अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की डीआईजी सोमा दास मित्रा और कोलकाता सेंट्रल के पुलिस उपायुक्त इंदिरा मुखर्जी सहायता करेंगे। एसआईटी का गठन ऐसे समय में किया गया है जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो इसी अस्पताल में (सीबीआई) प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना की जांच कर रहा है।

सीबीआई कर रही रेप, हत्या मामले की जांच

सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सेमिनार हॉल में बीते नौ अगस्त को ड्यूटी के दौरान स्नातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। अगले दिन इस ममाले में एक नागरिक स्वयंसेवक को गिरफ्तार किया गया था। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी थी। इस घटना से आक्रोषित देशभर के चिकित्सक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और पीड़िता के लिए न्याय और कार्यस्थलों पर बेहतर सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग कर रहे हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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