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BCI ने समलैंगिक विवाह पर SC में चल रही सुनवाई पर जताई गंभीर चिंता, कहा- सामाजिक ढांचा बिगड़ेगा

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Apr 24, 2023, 07:00 AM IST

एक प्रस्ताव में वकीलों के शीर्ष निकाय ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिकाओं की कानूनी मान्यता के लिए चल रही सुनवाई पर अपनी गंभीर चिंता जताई।

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Photo : BCCL

Bar Council of India: वकीलों के शीर्ष निकाय बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने समलैंगिक विवाह पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर अपनी गंभीर चिंता जताई है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट से समलैंगिक विवाह मामले पर फैसला सुनाने से बचने के लिए कहा। बीसीआई ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा किसी भी तरह से इसमें लिप्त होने का परिणाम देश की सामाजिक संरचना को अस्थिर करना कर देगा। इससे विवाह की अवधारणा मौलिक रूप से प्रभावित होगी।

जारी किया प्रस्ताव, जताई गंभीर चिंता

बीसीआई के साथ सभी राज्य बार काउंसिलों की एक संयुक्त बैठक के बाद रविवार शाम को जारी एक प्रस्ताव में वकीलों के शीर्ष निकाय ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही याचिकाओं की कानूनी मान्यता के लिए चल रही सुनवाई पर अपनी गंभीर चिंता जताई। इसने कहा कि समलैंगिक विवाह के कानूनी ढांचे में कोई भी बदलाव केवल विधायिका को ही करने दिया जाए।

इसने कहा कि भारत दुनिया के सबसे सामाजिक-धार्मिक विविधता वाले देशों में से एक है। इसलिए, कोई भी मामला जिसमें मौलिक सामाजिक संरचना के साथ छेड़छाड़ करने की संभावना है, हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक और धार्मिक विश्वासों पर दूरगामी प्रभाव डालता है। बैठक ने सर्वसम्मति से राय व्यक्त की कि ऐसे मामलों में विधायी प्रक्रिया के माध्यम से ही कोई बदलाव होना चाहिए। इस तरह के संवेदनशील मामले में शीर्ष अदालत का कोई भी फैसला हमारे देश की भावी पीढ़ी के लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकता है।

मौलिक रूप में बदलाव करना विनाशकारी होगा

बता दें कि बीसीआई सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिकाओं का पक्षकार नहीं है। बीसीआई के अनुसार, मानव सभ्यता और संस्कृति की स्थापना के बाद से विवाह को विशेष रूप से स्वीकार किया गया है और जैविक पुरुष और महिला के मिलन के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ऐसी पृष्ठभूमि में किसी भी कानून या अदालत द्वारा विवाह की अवधारणा के रूप में इसके मौलिक रूप में बदलाव करना विनाशकारी होगा, चाहे वह कितना भी नेकनीयत वाला क्यों न हो। देश के 99.9% से अधिक लोग हमारे देश में समलैंगिक विवाह के विचार के विरोध में हैं। विशाल बहुमत का मानना है कि इस मुद्दे पर याचिकाकर्ताओं के पक्ष में शीर्ष अदालत का कोई भी फैसला हमारे देश की संस्कृति और सामाजिक धार्मिक ढांचे के खिलाफ माना जाएगा।

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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