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Baba Siddique Murder Case: हमलावरों ने यूट्यूब वीडियो से सीखा पिस्तौल चलाना! अब हुआ ये बड़ा खुलासा

Baba Siddique Murder Case: बाबा सिद्दीकी हत्या मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। ये जानकारी सामने आई है कि हमलावरों ने संभवत: यूट्यूब वीडियो से पिस्तौल चलाना सीखा। अधिकारी ने बताया कि उन्होंने करीब चार सप्ताह तक यूट्यूब से वीडियो देखकर बंदूक में गोली भरना और गोली निकालना सीखा क्योंकि उन्हें अभ्यास के लिए कोई खुली जगह नहीं मिल सकी थी।

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बाबा सिद्दीकी की हत्या में शामिल हमलावरों के बारे में बड़ा खुलासा।

Maharashtra News: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या में शामिल हमलावरों के बारे में समझा जा रहा है कि उन्होंने यहां कुर्ला इलाके में किराए के एक मकान में यूट्यूब पर वीडियो देखकर बंदूक और पिस्तौल चलाना सीखा था। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। सिद्दीकी (66) की 12 अक्टूबर की रात को निर्मल नगर इलाके में स्थित उनके विधायक बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि तीन शूटर उनकी हत्या में शामिल थे।

कैसे बंदूक चलाना सीखा था संदिग्ध हमलावर शिवकुमार?

पुलिस अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है जिनमें दो कथित शूटर हरियाणा निवासी गुरमेल बलजीत सिंह (23) तथा उत्तर प्रदेश निवासी धर्मराज राजेश कश्यप (19) के अलावा हरीशकुमार बालकराम निषाद (23) और पुणे निवासी ‘‘सह-साजिशकर्ता’’ प्रवीण लोनकर शामिल हैं। निषाद और कश्यप उसी गांव के हैं, जहां का निवासी वांछित आरोपी शिवकुमार गौतम है।

मामले में जांच कर रही मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने आरोपियों से पूछताछ के दौरान पाया कि संदिग्ध हमलावर शिवकुमार गौतम ने उत्तर प्रदेश में विवाह समारोहों में ‘हर्ष फायरिंग’ के दौरान बंदूक चलाना सीखा था। अधिकारी ने गुरमेल सिंह और धर्मराज कश्यप से पूछताछ का हवाला देते हुए बताया कि गौतम को ‘‘मुख्य शूटर’’ के तौर पर सुपारी दी गई थी, क्योंकि वह बंदूक चलाना जानता था।

यूट्यूब से वीडियो देखकर बंदूक में गोली भरना और चलाना सीखा

उन्होंने कहा कि कुर्ला में किराए के एक मकान में गौतम ने कश्यप और सिंह को बंदूक चलाने का प्रशिक्षण दिया था जहां उन्होंने बंदूक (गोलियों के बगैर) चलाने का अभ्यास किया। अधिकारी ने बताया कि उन्होंने करीब चार सप्ताह तक यूट्यूब से वीडियो देखकर बंदूक में गोली भरना और गोली निकालना सीखा क्योंकि उन्हें अभ्यास के लिए कोई खुली जगह नहीं मिल सकी थी।

जांच अधिकारियों के अनुसार, तीनों शूटर ने सिद्दीकी पर हमला करने के बाद अपने कपड़े बदलने की योजना बनाई थी, और गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक ने पकड़े जाने से पहले अपने कपड़े बदले थे। गौतम अपने बैग में एक शर्ट लाया था जो अपराध स्थल के पास से बरामद किया गया था, जिसमें एक हथियार और कुछ दस्तावेज थे।

एक घंटे तक ऑफिस के बाहर बाबा सिद्दीकी का इंतजार करते रहे

एक अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने घटनास्थल पर उसी दोपहिया वाहन से पहुंचने की योजना बनाई थी जिसका इस्तेमाल उन्होंने सिद्दीकी के घर और कार्यालय की रेकी के लिए किया था। लेकिन हमले के दिन दो आरोपी दोपहिया वाहन से गिर गए, इसलिए उन्होंने ऑटो रिक्शा से जीशान सिद्दीकी के कार्यालय तक जाने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि वे कार्यालय के बाहर एक घंटे तक बाबा सिद्दीकी का इंतजार करते रहे। अधिकारी ने बताया कि प्रवीण लोनकर ने हरीशकुमार निसाद के खाते में 60,000 रुपये ट्रांसफर किए थे, जिन्होंने 32,000 रुपये में पुरानी मोटरसाइकिल खरीदी थी।

आरोपियों में से एक शुभम लोनकर से पुलिस ने जून में अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित आवास के बाहर गोलीबारी के संबंध में पूछताछ की थी। शुभम, प्रवीण लोनकर का भाई है और पुणे में डेयरी चलाता है। एक अधिकारी ने बताया कि शुभम लोनकर को जनवरी में महाराष्ट्र के अकोला जिले के अकोट थाने में दर्ज शस्त्र अधिनियम के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था और इस मामले में पुलिस ने उसके पास से दस से अधिक हथियार बरामद किए गए थे।

उन्होंने बताया कि शुभम से पूछताछ में पता चला कि वह लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल के संपर्क में था। अधिकारी ने बताया कि तब से उस पर पुलिस की नजर थी लेकिन 24 सितंबर के बाद उसका कुछ पता नहीं चल पाया। जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी व्यक्ति एक दूसरे से संवाद के लिए ‘स्नैपचैट’ और ‘इंस्टाग्राम’ जैसे सोशल मीडिया ऐप का इस्तेमाल करते थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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