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Ayodhya Ram Mandir : अगले साल 15 जनवरी से पहले खुल सकता है प्रभु श्रीराम का मंदिर, भक्‍तों को होंगे अलौकि‍क दर्शन

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 24, 2023, 11:36 PM IST

Ayodhya Ram Mandir : चंपत राय ने अयोध्या में हो रहे राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की प्रगति को उत्साहवर्धक बताया और कहा कि इस साल के अंत तक मंदिर के भूतल का कार्य पूरा हो जाएगा।

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15 जनवरी तक हो सकता है राम मंदिर का लोकार्पण।

Photo : BCCL

Ayodhya Ram Mandir : अयोध्‍या में असंख्‍य हिंदुओं का स्‍वप्‍न आकार ले रहा है। जी हां, हम बात कर रहे हैं श्रीरामजन्मभूमि मंदिर की। हालांकि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा और मंदिर के लोकार्पण की कोई तिथि अभी तय नहीं हुई है, लेकिन ऐसी आशा है कि इस साल 31 दिसंबर से अगले वर्ष के शुरू में 15 जनवरी के बीच किसी शुभ दिन ऐसा किया जा सकता है। यह जानकारी दी है, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महामंत्री चंपत राय ने। विश्व हिंदू परिषद मार्गदर्शक मंडल की गुरुवार से शुरू हो रही बैठक में हिस्सा लेने आए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महामंत्री चंपत राय ने कहा कि अभी अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के लोकार्पण की तारीखें केवल मीडिया में ही चर्चा में हैं और इस बारे में अभी न्यास में कोई बात नहीं हुई है।

इस साल भूतल का कार्य भी होगा पूर्ण

चंपत राय ने अयोध्या में हो रहे राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की प्रगति को उत्साहवर्धक बताया और कहा कि इस साल के अंत तक मंदिर के भूतल का कार्य पूरा हो जाएगा। वहीं, उन्‍होंने इस बात की भी उम्मीद जताई है कि इसके बाद 31 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच किसी ‘शुभ दिन’ भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा मंदिर में हो जाएगी। हांलांकि, उन्होंने कहा, अभी मंदिर ट्रस्ट में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तारीख पर कोई चर्चा नहीं हुई है। संतों से विचार विमर्श कर प्राण प्रतिष्ठा तथा मंदिर के लोकार्पण का कार्यक्रम तय किया जाएगा।

इस तरह आकार ले रहा हिंदुओं का स्‍वप्‍न

चंपत राय ने बताया है कि मंदिर पूरब से पश्चिम तक 380 फुट लंबा, दक्षिण से उत्तर की ओर 250 फुट चौड़ा है जबकि जमीन से शिखर तक मंदिर की ऊंचाई 161 फुट है। केवल ग्रेनाइट से बन रहे मंदिर के चबूतरे की ऊंचाई 16 फुट रखी गयी है जबकि मंदिर में तीनों मंजिलों में कुल 392 खंभे लगे हैं। राय ने कहा कि मंदिर निर्माण में कहीं भी लोहे और कंक्रीट का उपयोग नहीं किया गया है तथा केवल पत्थरों का प्रयोग किया जा रहा है जिन्हें तांबे की पत्तियों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर जब बन कर तैयार होगा तो देखने वालों के लिए अद्धभुत और आश्चर्जनक होगा।

(भाषा इनपुट के साथ)

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