Eid-Al Adha: ईद-उल-अजहा (बकरीद) से पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अपील का असर दिखाई दे रहा है। कई ईद समितियों ने लोगों से गाय की कुर्बानी न देने और त्योहार को सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने का आग्रह किया।
समितियों की यह अपील मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक आह्वान के जवाब में आई, जिन्होंने नागरिकों से शांति और सामाजिक एकता के हित में एक बड़ा संकल्प लेने का आग्रह किया था। असम में मुस्लिम आबादी लगभग 35 फीसदी है, वहां कई ईद समितियों द्वारा जिम्मेदार तरीके से त्योहार मानने को बढ़ावा देने के लिए समन्वित प्रयास देखे गए हैं।
सोशल मीडिया पर शेयर न करें तस्वीरें
समितियों ने कहा कि असम पशु संरक्षण अधिनियम के तहत गाय की कुर्बानी प्रतिबंधित है, और चेतावनी दी कि इसका उल्लंघन करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें कारावास और आर्थिक दंड शामिल हैं। उन्होंने लोगों से यह भी अपील की है कि वह पशु कुर्बानी महज निर्धारित स्थानों पर ही करें और साफ-सफाई तथा सार्वजनिक मर्यादा का पूरा ध्यान रखा जाए। साथ ही सोशल मीडिया पर कुर्बानी की तस्वीरें और वीडियो साझा न करने की सलाह भी दी गई है, ताकि किसी समुदाय की भावनाएं आहत न हों और सामाजिक सौहार्द बना रहे।
समितियों ने दिया भाईचारे का संदेश
ईद-उल-अज़हा को त्याग, करुणा और एकता का त्योहार बताते हुए, समितियों ने समाज के सभी वर्गों से शांति, भाईचारा और आपसी सम्मान बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने जनता से यह भी अपील की कि वे सुचारू और शांतिपूर्ण समारोह सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग करें।
गाय की कुर्बानी से करें परहेज
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा, ''धुबरी टाउन ईदगाह समिति ने लोगों से अपील की कि वह हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए और कानून का पालन करते हुए गाय की कुर्बानी से बचें।''
विभिन्न समितियों के आह्मान के बाद, धुबरी टाउन ईदगाह समिति ने भी लोगों से आग्रह किया कि वह हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करने और कानून का पालन करने के लिए गाय की कुर्बानी से परहेज करें। उन्होंने कहा, ''मैं सभी ईद समितियों से आह्वान करता हूं कि वह आगे आएं और इस ईद को गाय की कुर्बानी मुक्त बनाएं।''
