देश

दिल्ली में नया घर ढूंढ रहे अरविंद केजरीवाल, एक सप्ताह में छोड़ेंगे सीएम आवास

Arvind Kejriwal CM Residence: दिसंबर 2013 में पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने से पहले अरविंद केजरीवाल गाजियाबाद के कौशाम्बी इलाके में रहते थे। मुख्यमंत्री के तौर पर वह मध्य दिल्ली के तिलक लेन स्थित आवास में रहे। फरवरी 2015 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापस आने के बाद वह उत्तरी दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित आवास में रहने चले गए।

Image

एक सप्ताह में सीएम आवास खाली करेंगे अरविंद केजरीवाल।

Photo : Twitter

Arvind Kejriwal CM Residence: दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से मंगलवार को इस्तीफा देने वाले अरविंद केजरीवाल अगले कुछ सप्ताह में सिविल लाइंस स्थित अपना सरकारी बंगला खाली कर देंगे। आम आदमी पार्टी (आप) के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकारी आवास छोड़ने के बाद केजरीवाल और उनका परिवार दिल्ली में ही रहेगा। पार्टी पदाधिकारी ने बताया कि उनके लिए उपयुक्त आवास की तलाश जारी है।

नियमों के अनुसार, केजरीवाल को अपने इस्तीफे के एक महीने के भीतर सरकारी बंगला खाली करना होगा। रविवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के अपने फैसले की घोषणा करते हुए, केजरीवाल ने भाजपा पर दिन-रात उन पर कीचड़ उछालने और बदनाम करने का आरोप लगाया और लोगों से यह तय करने को कहा कि वह ईमानदार हैं या नहीं।

मुख्यमंत्री बनने से पहले गाजियाबाद में रहते थे केजरीवाल

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बंगले को शीशमहल बताते हुए आरोप लगाती रही है कि इसका नवीनीकरण केजरीवाल ने सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च करके कराया और नियमों का उल्लंघन किया। बता दें, दिसंबर 2013 में पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने से पहले केजरीवाल गाजियाबाद के कौशाम्बी इलाके में रहते थे। मुख्यमंत्री के तौर पर वह मध्य दिल्ली के तिलक लेन स्थित आवास में रहे। फरवरी 2015 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापस आने के बाद वह उत्तरी दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित आवास में रहने चले गए।

आतिशी होंगी दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री

अरविंद केजरीवाल के इस्तीफा देने के बाद आतिशी (43) दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री होंगी। उनसे पहले भाजपा नेता सुषमा स्वराज और कांग्रेस की शीला दीक्षित इस पद पर रह चुकी हैं। पार्टी विधायकों की सर्वसम्मति से दिल्ली की मुख्यमंत्री नामित किए जाने के बाद अपनी पहली टिप्पणी में आतिशी ने कहा कि यह मिलीजुली भावनाओं वाला क्षण है, क्योंकि एक तरफ खुशी है लेकिन दूसरी तरफ लोकप्रिय मुख्यमंत्री केजरीवाल के इस्तीफा देने का अत्यंत दुख भी है। केजरीवाल ने पार्टी विधायकों की एक बैठक में अपने उत्तराधिकारी के तौर पर आतिशी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article