Arunachal Pradesh: अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना के विरोध में कई संगठनों के 36 घंटे के बंद के आह्वान के कारण सोमवार को जनजीवन प्रभावित हुआ तथा इस दौरान कई स्कूल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बाजार बंद रहे। प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर टायर जलाए, जबकि जिले में बसों सहित सार्वजनिक परिवहन के अन्य साधन सड़कों से नदारद रहे।
'सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम' और 'सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन' ने सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में 36 घंटे के बंद का आह्वान किया था।
'विरोध में बंद का आह्वान'
एक अधिकारी ने बताया, 'बंद से अपर सियांग जिले में जनजीवन प्रभावित हुआ, जबकि ईस्ट सियांग में भी इसका असर पड़ा। हालांकि, सियांग जिले में बंद का कोई प्रभाव नहीं पड़ा।' संगठनों ने अपनी मांगों के कथित तौर पर पूरे नहीं होने के विरोध में बंद का आह्वान किया था। उनकी मांगों में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई, सुरक्षाबलों को हटाने और सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की विशाल सियांग अपर बहुउद्देश्यीय परियोजना के लिए जारी सर्वेक्षण गतिविधियों को रोकना शामिल है।
अपर सियांग के उपायुक्त अशोक ताजो ने पीटीआई को बताया, 'कई सरकारी कार्यालय और स्कूल बंद हैं। दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी बंद हैं। यिंगकियोंग शहर और गेकू में बंद का मुख्य रूप से असर है।' सियांग के पुलिस अधीक्षक कामदाम सिखोम ने कहा कि जिले में बंद का कोई असर नहीं पड़ा है और सभी सरकारी कार्यालय, दुकानें तथा स्कूल खुले हुए हैं।
भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक के रूप में परिकल्पित इस परियोजना को स्थानीय लोगों के कुछ वर्गों, विशेषकर प्रस्तावित परियोजना से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों के निवासियों के लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
इस विरोध की मुख्य वजह गांवों के जलमग्न होने, विस्थापन, कृषि भूमि और वन क्षेत्र का नुकसान तथा समुदाय की पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित होने की आशंकाएं हैं। इस परियोजना का केंद्र सरकार के लिए रणनीतिक महत्व भी है। केंद्र इसे तिब्बत में यारलुंग सांगपो नदी पर चीन की प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानता है। यही नदी भारत में प्रवेश करने पर सियांग के नाम से जानी जाती है।
