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जूस की दुकान से सट्टेबाजी किंग तक...सौरभ चंद्राकर ने कैसे खड़ा किया काली कमाई का साम्राज्य?

सौरभ चंद्राकर मूल रूप से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर भिलाई का रहने वाला है। वह आर्थिक रूप से कोई बहुत संपन्न परिवार से नहीं था। भिलाई में ही वह अपने शुरुआती दिनों में एक सामान्य जूस की दुकान चलाता था।

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सौरभ चंद्राकर की काली कमाई का साम्राज्य
Authored by: अमित कुमार मंडल
Updated Nov 2, 2026, 15:02 IST
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भारत के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में गिने जाने वाले महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप (Mahadev Betting App) सिंडिकेट के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यर्पित करके लाया जा चुका है। ₹6,000 करोड़ से अधिक के इस मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध सट्टेबाजी साम्राज्य की शुरुआत एक बेहद साधारण शख्सियत से हुई थी। वो शख्स जिसे कल तक कोई नहीं जानता था, एक छोटे से शहर में जूस बेचकर परिवार चला रहा था, रातोंरात चर्चा में आ गया और मोस्ट वांटेड अपराधी बन गया। अपराध ऐसा कि उसे देश छोड़कर भागना पड़ा, लेकिन ये पैंतरा भी काम नहीं आया और भारतीय एजेंसियों ने उस पर शिकंजा कस दिया। आइए इस पूरे क्राइम सिंडिकेट, इसकी कार्यप्रणाली और इसके सरगना की पतन की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।

कौन है सौरभ चंद्राकर?

सौरभ चंद्राकर मूल रूप से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर भिलाई का रहने वाला है। वह आर्थिक रूप से कोई बहुत संपन्न परिवार से नहीं था। भिलाई में ही वह अपने शुरुआती दिनों में एक सामान्य जूस की दुकान चलाता था। जूस की दुकान चलाते-चलाते उसकी मुलाकात स्थानीय सट्टेबाजों और जुआरियों से हुई। खेल के प्रति स्वभाविक समझ और जोखिम उठाने की क्षमता ने उसे सट्टे की दुनिया की तरफ धकेल दिया। उसने स्थानीय स्तर पर क्रिकेट मैचों में सट्टा लगवाना शुरू किया। इस धंधे में उसकी मुलाकात रवि उप्पल से हुई, जो इस साम्राज्य का दूसरा मुख्य मास्टरमाइंड बना। दोनों ने मिलकर लोकल सट्टेबाजी को एक डिजिटल और संगठित अपराध में बदलने की योजना बनाई।

कैसे खड़ा किया 'महादेव बुक' का साम्राज्य?

सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने पारंपरिक सट्टेबाजी को पीछे छोड़ते हुए इसे तकनीक और इंटरनेट के जरिए पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने 'महादेव ऑनलाइन बुक' नाम से एक मास्टर वेबसाइट और कई सब्सिडियरी ऐप लॉन्च किए। इस नेटवर्क को चलाने के लिए उन्होंने 'फ्रेंचाइजी मॉडल' अपनाया। देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को इसके 'पैनल' (आईडी और पासवर्ड) बेचे जाते थे। हर पैनल का एक मालिक होता था, जो आगे सब-पैनल बांटता था।

क्या-क्या होता था इस ऐप पर?

इस प्लेटफॉर्म पर सिर्फ क्रिकेट (आईपीएल) ही नहीं, बल्कि फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन, पोकर, कैसिनो गेम, तीन पत्ती और यहां तक कि चुनावों के परिणामों पर भी सट्टा लगाया जाता था। सट्टे के करोड़ों-अरबों रुपये के लेन-देन के लिए भारत भर में गरीब और अनजान लोगों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए गए। इन खातों को 'म्यूल अकाउंट' कहा जाता है, जिनके जरिए पैसों को एक जगह से दूसरी जगह घुमाया जाता था ताकि एजेंसियों की नजर से बचा जा सके। भारत से अवैध तरीके से कमाए गए काले धन को यूएई (दुबई) और अन्य देशों में भेजने के लिए हवाला चैनलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।

वो शाही शादी जिसने एजेंसियों की पोल खोली

यह पूरा सिंडिकेट वर्षों तक पर्दे के पीछे फल-फूल रहा था, लेकिन साल 2023 के फरवरी महीने में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रास अल खैमाह में हुई सौरभ चंद्राकर की शादी ने इस पूरे साम्राज्य को एक्सपोज कर दिया। इस शादी पर पानी की तरह पैसा बहाया गया, अनुमान लगाया गया कि सौरभ ने करीब ₹200 करोड़ इस शादी में लुटा दिए। मेहमानों को लाने और ले जाने के लिए विशेष प्राइवेट जेट किराए पर लिए गए थे। बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और सेलिब्रिटीज ने इस शादी में शिरकत की और परफॉर्म किया, जिन्हें करोड़ों रुपये का भुगतान हवाला और नकद में किया गया था। इस भव्यता और कोरड़ों के खर्च ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य खुफिया एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद ED ने इस मामले की गहन जांच शुरू की और कई बड़े खुलासे हुए।

बॉलीवुड कनेक्शन और वीआईपी मेहमान

जांच एजेंसियों (ED) की चार्जशीट में यह भी सामने आया कि महादेव ऐप के प्रमोटर्स ने दुबई में अपनी कंपनियों और पार्टियों में कई बॉलीवुड हस्तियों, फिल्म निर्माताओं और मॉडल्स को बुलाया था। कई कलाकारों पर ऐप के प्रचार-प्रसार और एंडोर्समेंट के बदले अवैध धन लेने के आरोप लगे, जिसके बाद कई नामी हस्तियों से पूछताछ भी की गई थी।

शिकंजा, रेड कॉर्नर नोटिस और प्रत्यर्पण

जब भारत में शिकंजा कसा, तब तक सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई भाग चुके थे और वहीं से सेफ जोन में बैठकर अपना सिंडिकेट चला रहे थे। ED और CBI ने देश-विदेश में सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगियों की हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियां (जैसे बुर्ज खलीफा में अपार्टमेंट, लग्जरी गाड़ियां, और बैंक खाते) सीज और अटैच कर लीं। भारत सरकार के अनुरोध पर इंटरपोल (Interpol) द्वारा इन आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी किया गया था।

ओमान में हिरासत और प्रत्यर्पण

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, केंद्रीय एजेंसियों (CBI/ED) और विदेशी एजेंसियों के सहयोग से ओमान में सौरभ चंद्राकर को ट्रैक किया गया और उसे हिरासत में लिया गया। अब उसे भारत लाया जा चुका है, जहां अदालत में उस पर मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के गंभीर मामलों की सुनवाई चल रही है। यह पूरा मामला भारत के इतिहास के सबसे बड़े डिजिटल फ्रॉड और साइबर-सट्टेबाजी नेटवर्क के पर्दाफाश का एक प्रमुख उदाहरण है, जो यह दिखाता है कि कैसे एक छोटे स्तर का अपराधी तकनीक और काले धन के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का सिंडिकेट चला रहा था।

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