'चड्डा-फड्डा-भड्डा'; ममता बनर्जी की ये कैसी भाषा, नड्डा ने इस तरह किया पलटवार

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Dec 10, 2020, 08:53 PM IST

पश्चिम बंगाल में अपने काफिले के ऊपर हुए हमले पर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि ये घटना बंगाल के बारें में एक गलत धारणा बनाने के लिए प्रमाण के रूप में हमारे सामने आती है।

'चड्डा-फड्डा-भड्डा'; ममता बनर्जी की ये कैसी भाषा, नड्डा ने इस तरह किया पलटवार

नई दिल्ली: अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 2 दिन के दौरे पर बंगाल पहुंचे हैं। गुरुवार को डायमंड हार्बर में नड्डा और भाजपा नेताओं के काफिले पर हमला हुआ। हमले में वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय सहित कई लोग घायल हो गए। हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हमले को नाटक करार दिया।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बनर्जी ने कहा, 'उनके (भाजपा) पास कोई और काम नहीं है। कई बार गृह मंत्री यहां होते हैं, बाकी समय उनके चड्ढा, नड्डा, फड्डा, भड्डा यहां होते हैं। जब उनके पास कोई दर्शक नहीं होता है, तो वे अपने कार्यकर्ताओं को नौटंकी करने के लिए कहते हैं।' 

ममता ने आगे कहा कि आपके साथ सुरक्षाकर्मी हैं। कोई आप पर हमला कैसे कर सकता है? हमले की योजना बनाई गई होगी, मैंने पुलिस से जांच करने के लिए कहा है लेकिन मैं हर समय झूठ नहीं बोलूंगी। वे (भाजपा कार्यकर्ता) हर दिन हथियारों के साथ (रैलियों के लिए) आते हैं। वे खुद को थप्पड़ मार रहे हैं और इसका आरोप तृणमूल कांग्रेस पर लगा रहे हैं। जरा स्थिति के बारे में सोचिए। वे बीएसएफ, सीआरपीएफ, सेना और सीआईएसएफ के साथ घूम रहे हैं...तो फिर आप इतने भयभीत क्यों हो। 

वहीं इस पर पलटवार करते हुए नड्डा ने कहा, 'उन्होंने मेरे बारे में बहुत सारी संज्ञाएं, विचार और शब्दावली दी है। ममता जी ये आपके संस्कारों के बारे में बताता है और ये बंगाली संस्कृति नहीं है...ममता जी बंगाल को कितना नीचे ले गई हैं।' 

नड्डा ने आगे कहा कि बंगाल में 130 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है। 100 का तर्पण मैंने खुद कोलकाता में आकर किया है। भाजपा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक कारणों से हत्या हुई, इसे बंगाल की जनता कभी माफ नहीं करेगी। बंगाल की जनता को ये तय करना है कि क्या ऐसी संस्कृति उन्हें यहां रखनी है? जब चुने हुई जनप्रतिनिधि सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी की क्या हालत होगी? आज जो घटना हुई है वह ममता जी की बौखलाहट की कहानी है। उनको दिख चुका है कि उनकी जमीन खिसक चुकी है। उनकी शब्दावली ऐसी है कि जिसे बोलने में भी शर्म आए। मुख्यमंत्री पद की गरिमा क्या होती है शायद उनको ये मालूम नहीं है। 

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