Gurugram News: गुरुग्राम की बादशाहपुर तहसील में करीब 55,000 करोड़ रुपये के संपत्ति लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आयकर विभाग के सर्वे में लगभग 25,000 संपत्तियों के दस्तावेजों में गड़बड़ियां मिली हैं। इनमें कई रजिस्ट्रेशन में एक ही पैन नंबर के इस्तेमाल का मामला भी शामिल है। मामले की जांच के लिए आयकर विभाग के चंडीगढ़ स्थित निदेशक (जांच एवं आपराधिक खुफिया) ने सात सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम फिलहाल बादशाहपुर तहसील कार्यालय में संपत्तियों के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
55,000 करोड़ रुपये के लेनदेन में अनियमितताओं की आशंका
आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, लगभग 12,000 संपत्तियों से जुड़े करीब 15,000 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी विभाग को नहीं मिली थी। इसके बाद करीब 25,000 संपत्तियों के रिकॉर्ड की जांच की गई, जिसमें सामने आया कि कई लेनदेन की जानकारी विभाग को नहीं दी गई थी या रजिस्ट्रेशन के दौरान गलत पैन नंबर दर्ज किए गए थे। इन संपत्तियों से जुड़े लगभग 55,000 करोड़ रुपये के लेनदेन में अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। विभाग वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए रिकॉर्ड का मिलान कर रहा है।
स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन कब दाखिल होता है?
जांच के दायरे में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की भूमिका भी शामिल है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अधिक मूल्य वाले संपत्ति लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग तक क्यों नहीं पहुंची और रजिस्ट्री के दौरान पैन नंबरों का सत्यापन किस तरह किया गया। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक, अब तक किसी भी अधिकारी की संलिप्तता साबित करने वाला कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है। अधिकारियों ने बताया कि 30 लाख रुपये से अधिक के संपत्ति लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को देने के लिए स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन (SFT) दाखिल किया जाता है।
सात सदस्यीय टीम मामले की जांच कर रही
हरियाणा सरकार ने मई 2026 तक का SFT डेटा उपलब्ध कराया है, लेकिन विभाग के अनुसार, उपलब्ध जानकारी में पूरी पारदर्शिता नहीं मिली है। विभागीय जानकारी के मुताबिक, गुरुवार तक 140 तहसीलदारों ने निर्धारित समय से पहले और 120 तहसीलदारों ने तय समयसीमा के अंदर अपनी SFT रिपोर्ट जमा की। आयकर विभाग ने लंबित रिपोर्टों को पारदर्शी तरीके से दाखिल करने और संपत्ति पंजीकरण के रिकॉर्ड में मौजूद अनियमितताओं को दूर करने पर जोर दिया है। इस बीच, एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने हजारों संपत्ति रजिस्ट्रेशन में एक ही पैन नंबर के इस्तेमाल की संभावना पर सवाल उठाए हैं। अधिकारी के मुताबिक, यह गड़बड़ी कंप्यूटर सिस्टम या ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी खामी के कारण भी हो सकती है। फिलहाल, सात सदस्यीय टीम मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि रिकॉर्ड में मिली अनियमितताएं तकनीकी त्रुटियों का परिणाम हैं या इनके पीछे जानबूझकर की गई कोई गड़बड़ी है।
