नई दिल्ली: संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने गारंटीशुदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर प्रस्तावित समिति के गठन को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। एसकेएम ने विवरण प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करते हुए कहा है कि वह इसका विवरण जाने बिना अपने प्रतिनिधियों के नाम नहीं भेजेगा। एसकेएम ने आरोप लगाए कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कमेटी के सवालों को केंद्र सरकार टाल रही है।
एसकेएम का बयान
एसकेएम ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार ने एमएसपी पर प्रस्तावित समिति के बारे में संयुक्त किसान मोर्चा के सवालों को टाल दिया है। बयान के मुताबिक, '22 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चा समिति के सदस्य युद्धवीर सिंह को कृषि सचिव संजय अग्रवाल का फोन आया जिसमें भारत सरकार द्वारा गठित की गई समिति के लिए एसकेएम से दो से तीन नामों को आमंत्रित किया गया है। इस मौखिक संदेश से यह कुछ स्पष्ट नहीं हुआ कि इस समिति में और किन्हें शामिल किया जाएघा और इसका काम (मैंडेट) तथा कार्यकाल कितना होगा तथा यह कैसे काम करेगी। एसकेएमस ने तब तक समिति के लिए नाम नहीं देने से मना किया है जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि इस कमेटी में कौन होंगे, यह क्या करेगी और कैसे काम करेगी।'
एसकेएम ने कहा नहीं मिला जवाब
एसकेम ने बताया कि 30 मार्च को यह मेल फिर से भेजी गई है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। एसकेएम के बयान के मुताबिक, 'हम सरकार से समिति के विवरण पर स्पष्टीकरण की मांग करते हैं। जब तक इस समिति के स्वरूप और कार्यसूची से पूरी तरह अवगत नहीं होंगे तब तक ऐसी किसी समिति में भाग लेना सार्थक नहीं होगा।'
सरकार ने दिया था ये बयान
सरकार ने शुक्रवार को संसद में कहा कि कृषि उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) संबंधी मुद्दों पर विचार करने के वास्ते समिति गठित करने के लिए वह प्रतिबद्ध है और इसकी प्रक्रिया चल रही है तथा इस संबंध में संयुक्त किसान मोर्चा से नाम मांगे गए हैं। तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि प्राकृतिक खेती, फसलों में विविधता और एमएसपी को प्रभावी व पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री व किसानों के प्रतिनिधियों की एक समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कार्रवाई चल रही है और संयुक्त किसान मोर्चा से बातचीत की जा रही है। उन्होंने कहा कि मोर्चा से नाम मांगे गए हैं और नाम मिलते ही समिति गठित कर दी जाएगी।

