सरकार को साहूकार नहीं, मां की तरह व्यवहार करना होगा, गरीबों की जेब में सीधे जाए पैसा- राहुल गांधी

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 16, 2020, 12:55 PM IST

Rahul Gandhi on Economic Package: आर्थिक पैकेज को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र को आर्थिक पैकेज पर फिर से विचार करना चाहिए।

सरकार को साहूकार नहीं, मां की तरह व्यवहार करना होगा, गरीबों की जेब में सीधे जाए पैसा- राहुल गांधी
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 नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र के आर्थिक पैकेज को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने कहा कि गरीबों की जेब में सीधा पैसा जाना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि लोगों को कर्ज नहीं कैश की जरूरत है। क्षेत्रीय संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को साहूकार की तरह काम नहीं करना चाहिए। 

बड़ा तूफान आना बांकि

उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों की मदद करनी चाहिए और अगर लोगों को काम मिलेगा तो देश की रेटिंग अपने आप ठीक हो जाएगी। राहुल गांधी ने कहा कि देश को बहुत बड़ा नुकसान होने वाला है और मजदूरों को अभी का दौर सबसे नाजुक दौर है। उन्होंने कहा कि अभी बड़ा आर्थिक तूफान आना बांकि है। राहुल ने कहा, 'मैं प्रधानमंत्री जी से आग्रह करूंगा कि वो सीधे पैसा ट्रांसफर करें और मनरेगा में 200 दिन का रोजगार दें। सरकार को गरीबों और किसानों को सीधे कैश देना चाहिए क्योंकि ये हमारा भविष्य हैं।'

अपने आप ठीक हो जाएगी रेटिंग

सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'सरकार को लगता है कि अगर हमारा राजकोषीय घाटा बढ़ जाएगा तो विदेश की जो एजेंसियां हैं, वे हमारी रेटिंग कम कर देंगी। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि हिन्दुस्तान की जो रेटिंग है वो हिन्दुस्तान के लोगों से है। इसलिए सरकार को विदेश के बारे में सोचकर काम नहीं करना चाहिए। अगर यहां लोगों को काम मिलेगा तो देश की रेटिंग अपने आप ठीक हो जाएगी।' राहुल ने कहा कि गांवो में मनरेगा और शहरों में न्याय योजना की तर्ज पर गरीबों के खाते में पैसा डाला जाए।

कर्ज का पैकेज नहीं चाहिए

राहुल गांधी ने कहा, 'मैं सरकार पर दवाब डालना चाहता हूं। मुझे लगता है कि अगर सरकार पर दबाव बनता है तो शायद वो हमारी बात को सुने। जो पैकेज होना चाहिए वो कर्ज का पैकेज नहीं होना चाहिए। हमारे माइग्रेंट वर्कर, किसान और गरीब लोगों की जेब में पैसा डालने की जरूरत है। इन लोगों को कर्ज नहीं पैसे देने की जरूरत है। कोई बच्चा जब रोता है तो मां उसे लोन नहीं देती, बल्कि उसे चुप कराने का उपाय निकालती है, उसे ट्रीट देती है। सरकार को साहूकार नहीं, मां की तरह व्यवहार करना होगा। '

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