जब SPG ने आदित्य ठाकरे को कार से उतर जाने को कहा, PM की अगवानी करने पहुंचे थे CM के बेटे 

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 15, 2022, 07:36 AM IST

Maharashtra News : एसपीजी के इस फैसले से सीएम उद्धव परेशान दिखाई दिए और अपने बेटे का समर्थन किया। सीएम ने सुरक्षाकर्मियों से कथित रूप से कहा कि आदित्य केवल उनके बेटे ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी हैं।

जब SPG ने आदित्य ठाकरे को कार से उतर जाने को कहा, PM की अगवानी करने पहुंचे थे CM के बेटे 

Aaditya Thackeray : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को महाराष्ट्र के दौरे पर थे। इस दौरान एक अजीबो-गरीब घटना सामने आई। पीएम की सुरक्षा करने वाली स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आदित्य ठाकरे को अपने पिता एवं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की कार से उतर जाने के लिए कहा। सूत्रों के मुताबिक एसपीजी ने दावा कि आदित्य ठाकरे का नाम मुंबई में पीएम मोदी की अगवानी करने वाले वीआईपी की सूची में शामिल नहीं था। 

सीएम उद्धव ने दिया दखल
हालांकि, एसपीजी के इस फैसले से सीएम उद्धव परेशान दिखाई दिए और अपने बेटे का समर्थन किया। सीएम ने सुरक्षाकर्मियों से कथित रूप से कहा कि आदित्य केवल उनके बेटे ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी हैं। बाद में उन्हें कार में यात्रा करने की इजाजत दी गई। इसके बाद पीएम राज भवन गए और वहां क्रांतिकारियों पर अंडरग्राउंड बनाए गए संग्रहालय का उद्घाटन किया।

'मनुष्य जन्म में सबसे दुर्लभ संतों का सत्संग'
पुणे के देहू में तुकाराम महाराज मंदिर का उद्घाटन करने के बाद पीएम ने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि मनुष्य जन्म में सबसे दुर्लभ संतों का सत्संग है। संतों की कृपा अनुभूति हो गई तो ईश्वर की अनुभूति अपने आप हो जाती है। आज देहू की इस पवित्र तीर्थ-भूमि पर आकर मुझे ऐसी ही अनुभूति हो रही है। 

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'संतो की धरती है भारत'
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें गर्व है कि हम दुनिया की प्राचीनतम जीवित सभ्यताओं में से एक हैं। इसका श्रेय भारत की संत परंपरा को जाता है। उन्होंने कहा कि भारत शाश्वत है, क्योंकि भारत संतों की धरती है। हर युग में हमारे यहां, देश और समाज को दिशा देने के लिए कोई न कोई महान आत्मा अवतरित होती रही है।  पीएम ने कहा कि आज देश संत कबीरदास की जयंती मना रहा है। संत तुकाराम जी की दया, करुणा और सेवा का वो बोध उनके अभंगों  के रूप आज भी हमारे पास है। इन अभंगों ने हमारी पीढ़ियों को प्रेरणा दी है। जो भंग नहीं होता, जो समय के साथ शाश्वत और प्रासंगिक रहता है, वही तो अभंग है।
 

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