भारत-नेपाल के बीच फिर शुरू हुई 'दोस्ती की रेल', जानिए इस रूट का इतिहास

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 2, 2022, 09:15 PM IST

भारत और नेपाल के बीच एक बार फिर 'दोस्‍ती की रेल' शुरू हुई है। इस रूट पर साल 1937 में भी ट्रेनें चला करती थीं। एक बार फिर इस मार्ग पर रेल सेवा शुरू होने से दोनों देशों के बीच आवागमन सुचारु होगा तो पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

भारत-नेपाल के बीच फिर शुरू हुई 'दोस्ती की रेल', जानिए इस रूट का इतिहास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा ने शनिवार को दिल्ली के हैदराबाद हाउस से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हरी झंडी दिखाकर  जयनगर-जनकपुर- कुर्था रेलखंड पर रेल यात्री सेवा की शुरूआत की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कहा कि दोनों देशों के बीच क्रॉस बॉर्डर कनेक्टिविटी इनीशिएटिव्स के तहत जयनगर-कुर्था रेल लाइन की शुरुआत हुई है। दोनों देशों के लोगों के बीच सुगम, बाधारहित आदान-प्रदान हो ये दोनों सरकारों की कोशिश रहेगी। 

आज से करीब 85 साल पहले इस रूट पर साल 1937 में भारत के जयनगर और नेपाल के बैजलपुर के बीच ट्रेनें चला करती थीं। साल 2001 में नेपाल में आई बाढ में रेलपुलों के नष्ट होने के बाद जनकपुर से आगे ट्रेन सेवा बंद करनी पड़ी थी, जबकि जनकपुर से जयनगर तक मार्च, 2014 तक ट्रेनों का परिचालन जारी रहा। विदेश मंत्रालय, भारत सरकार एवं नेपाल सरकार के आपसी समझौते के तहत जयनगर-बैजलपुरा-बर्दीबास के बीच नई बड़ी रेल लाईन स्थापित करने का काम शुरू हुआ।

68 किलोमीटर लंबा रेल रूट

जयनगर-बिजलपुरा-बर्दीबास रेल रूट की लंबाई 68 किलोमीटर है। इसमें करीब 127 छोटे पुल, 15 बड़े रेलपुल, 8 स्टेशन के साथ ही 6 हॉल्ट तथा 47 रोड क्रॉसिंग स्थित है। जयनगर-बिजलपुरा-बर्दीबास रेल परियोजना बिहार के मधुबनी जिला एवं नेपाल के धनुसा महोतारी और सिरहा जैसे सघन आबादी वाले जिले से गुजरता है। इस रेलखंड पर भारत के जयनगर एवं नेपाल के इनरवा स्टेशनों पर कस्टम चेकिंग प्वाइंट बनाए गए हैं।

भारत के जयनगर और नेपाल के कुर्था के बीच डेमू सेवा के परिचालन प्रारंभ हो जाने के दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में बढ़ोत्तरी होगी। साथ ही दोनों देशों के बीच पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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