Congress Presidential Election: दिग्विजय सिंह ने किया चुनाव नहीं लड़ने का फैसला, अब मैदान में होंगे गहलोत और थरूर

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 23, 2022, 05:30 PM IST

Congress Presidential Election: शुक्रवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी उम्मीदवारी की पुष्टि की है। साथ ही अशोक गहलोत ने ये भी पुष्टि की कि राहुल गांधी ने ये साफ कर दिया है कि गांधी परिवार का कोई भी सदस्य अगला पार्टी अध्यक्ष नहीं बनेगा।

Congress Presidential Election: दिग्विजय सिंह ने किया चुनाव नहीं लड़ने का फैसला, अब मैदान में होंगे गहलोत और थरूर

Congress Presidential Election: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को कहा कि वह अध्यक्ष पद की दौड़ में नहीं हैं। जबलपुर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन पार्टी में उच्च अधिकारी द्वारा उन्हें दिए गए निर्देश का पालन करेंगे। अध्यक्ष पद की रेस से दिग्विजय सिंह के पीछे हटने से अब अशोक गहलोत और शशि थरूर इस पद के लिए शीर्ष दावेदार हैं।

दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ने का किया फैसला

कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे अशोक गहलोत

शुक्रवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी उम्मीदवारी की पुष्टि की है। साथ ही अशोक गहलोत ने ये भी पुष्टि की कि राहुल गांधी ने ये साफ कर दिया है कि गांधी परिवार का कोई भी सदस्य अगला पार्टी अध्यक्ष नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजे चाहे जो भी हों, एकजुट होकर काम करना और ये सुनिश्चित करना जरूरी है कि पार्टी एक मजबूत विपक्षी दल के रूप में उभरे।

इसके साथ ही राजस्थान कैबिनेट में भी फेरबदल की उम्मीद है, क्योंकि अगर गहलोत पार्टी अध्यक्ष का पद संभालते हैं, तो उन्हें अपने सीएम पद से इस्तीफा देना होगा क्योंकि राहुल गांधी ने गुरुवार को साफ किया कि 'एक व्यक्ति, एक पद' होगा। वहीं गहलोत ने कहा कि राजस्थान सरकार का नेतृत्व करने के लिए उनके उत्तराधिकारी के संबंध में कोई भी फैसला कांग्रेस की मौजूदा अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रदेश में पार्टी मामलों के प्रभारी अजय माकन द्वारा लिया जाएगा।

कांग्रेस ने गुरुवार को पार्टी के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी की थी। राहुल गांधी के अध्यक्ष पद का चुनाव न लड़ने के संकेत देने के मद्देनजर पार्टी का नेतृत्व दशकों बाद किसी गैर-गांधी नेता के हाथों में जाने की संभावना जताई जा रही है।  

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