Trump Visa Action PREM Impact on IT Sector : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारतीय IT सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। Microsoft, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Wipro और HCL Technologies समेत 8 बड़ी टेक कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के Green Card आवेदन से जुड़े पर्मानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने इन कंपनियों पर वर्कर वीजा सिस्टम के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। इस फैसले के बाद भारतीय IT कंपनियों के शेयरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। गुरुवार को अमेरिकी बाजार में Infosys और Wipro के ADR करीब 3% गिरे। अब शुक्रवार, 9 अक्टूबर को भारतीय बाजार में Infosys, TCS, Wipro और HCL Tech समेत IT शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी।
ट्रंप प्रशासन ने किन IT कंपनियों पर लिया एक्शन?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance और लेबर मिनिस्टर Keith Sonderling ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को इस कार्रवाई की जानकारी दी। जिन 8 कंपनियों के नाम सामने आए हैं, उनमें Microsoft, Adobe, Cognizant, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Wipro, HCL Technologies और Capgemini शामिल हैं। लेबर डिपार्टमेंट के मुताबिक, इन कंपनियों से जुड़े नए और पहले से लंबित PERM आवेदनों की प्रक्रिया रोक दी गई है। उपराष्ट्रपति JD Vance ने संकेत दिया कि यह निलंबन अनिश्चित अवधि तक जारी रह सकता है।
क्यों उठाया गया ये कदम?
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को पर्याप्त अवसर दिए बिना विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस व्यवस्था का इस्तेमाल करती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन कंपनियों ने 2009 से अब तक लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन या मांग की थी। अमेरिकी प्रशासन ने इसे अपने रोजगार बाजार की सुरक्षा से जोड़कर देखा है। ये प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोप हैं, किसी अंतिम कानूनी फैसले में साबित तथ्य नहीं।
Infosys और Wipro के ADR में 3% की गिरावट
अमेरिकी बाजार से मिले संकेत भारतीय IT निवेशकों की चिंता बढ़ा सकते हैं। गुरुवार को Infosys और Wipro के American Depositary Receipts (ADRs) में करीब 3% की गिरावट आई। Financial Express की रिपोर्ट के मुताबिक, Infosys का ADR कारोबार के दौरान 52-सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गया था। ADR के जरिए अमेरिकी निवेशक विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकते हैं। इनकी गिरावट से भारतीय बाजार में संबंधित शेयरों को लेकर धारणा प्रभावित हो सकती है, हालांकि अमेरिकी ADR और भारतीय शेयरों की चाल हमेशा एक जैसी नहीं होती। इसके अलावा भारतीय IT सेक्टर की चिंता सिर्फ अमेरिका की वीजा नीति तक सीमित नहीं है। वैश्विक कंपनियों के IT खर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बदलते कारोबारी मॉडल और कमजोर आर्थिक माहौल को लेकर भी निवेशक सतर्क हैं। ऐसे में अमेरिकी इमिग्रेशन नीति का नया जोखिम सेक्टर के शेयरों पर दबाव बढ़ा सकता है।
TCS में नतीजों के बाद एक्शन पर रहेगी नजर
TCS ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे घोषित किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 15% बढ़कर ₹13,884 करोड़ रहा। एक साल पहले इसी तिमाही में यह ₹12,075 करोड़ था। कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू 11% बढ़कर ₹73,188 करोड़ पहुंच गया। TCS ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹12 प्रति शेयर का दूसरा अंतरिम डिविडेंड भी घोषित किया है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 14 अक्टूबर और भुगतान की तारीख 30 अक्टूबर 2026 तय की गई है। हालांकि, मजबूत मुनाफे के बावजूद निवेशकों को अमेरिकी वीजा नीति, IT खर्च में संभावित सुस्ती और शेयर बाजार की कमजोरी पर ध्यान देना होगा। TCS के नतीजे और अमेरिकी कार्रवाई, दोनों ही शुक्रवार के कारोबार में IT सेक्टर की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रह सकते हैं।
शेयर बाजार पहले से ही भारी दबाव में
गुरुवार, 8 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली हुई। Sensex 1,045.46 अंक यानी करीब 1.44% गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 में 371.25 अंक यानी करीब 1.64% की गिरावट आई और यह 22,231.80 पर बंद हुआ। Sensex 32 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty का बंद स्तर करीब 18 महीने का निचला स्तर था। बाजार पर महंगे क्रूड ऑयल, रुपये की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और RBI की सख्त मौद्रिक नीति का दबाव है। भारतीय रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.5% किया था। गुरुवार को Brent क्रूड की कीमत भी करीब 4% बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई थी।
IT शेयरों के अलावा इन कंपनियों पर भी नजर
शुक्रवार को केवल IT सेक्टर ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य कंपनियां भी अपनी खबरों के कारण चर्चा में रह सकती हैं। ITC में गुरुवार को करीब ₹9,395 करोड़ का बड़ा ब्लॉक डील हुआ। GQG Partners Emerging Markets Equity Fund ने 36.51 करोड़ शेयर ₹257.35 प्रति शेयर के भाव पर बेचे। दूसरी ओर, Fidelity, ICICI Prudential Mutual Fund और SBI Mutual Fund समेत कई निवेशकों ने शेयर खरीदे। इसलिए ITC में संस्थागत निवेशकों की खरीद-बिक्री पर नजर रहेगी। वहीं, Reliance Industries Jio Platforms की प्रस्तावित IPO प्रक्रिया और किफायती सेवाएं उपलब्ध कराने पर कंपनी के जोर के कारण चर्चा में रह सकती है। इसके अलावा Cochin Shipyard अमेरिका, जर्मनी, नॉर्वे और अन्य देशों से 40 से ज्यादा जहाज बनाने के ऑर्डर मिलने के चलते चर्चा में है।
TCS ने दी प्रतिक्रिया
इस मामले में TCS ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमने US सरकार के परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) के अनाउंसमेंट पर ध्यान दिया है और TCS डिपार्टमेंट ऑफ लेबर के किसी भी निर्देश का पालन करेगी। US में हमारी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी लोकल टैलेंट को हायर करने पर आधारित है, जिसे एक मजबूत कैंपस रिक्रूटमेंट मॉडल का सपोर्ट मिला है। हमने पूरे देश में 31 ऑफिस और डिलीवरी सेंटर में एक बड़ा लोकल वर्कफोर्स बनाया है। जैसा कि हमने पहले अनाउंस किया था, हम अगले पांच सालों में US में और 15,000 लोगों को हायर करने का इरादा रखते हैं, ताकि हमारे लोकल वर्कफोर्स को और बढ़ाया जा सके। पिछले दो सालों में हमारे PERM एप्लीकेशन सिंगल डिजिट में थे और इसलिए हमें उम्मीद नहीं है कि प्रोग्राम के सस्पेंशन से हमारी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी और कस्टमर एंगेजमेंट पर कोई असर पड़ेगा।”
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