दिल्ली में बन रहा नया थल सेना भवन कई खूबियों से लैस होगा। ये आधुनिक इमारत दिल्ली छावनी में मानेकशॉ केंद्र के सामने बन रही है। इमारत में विभिन्न सेना मुख्यालय कार्यालय होंगे, जो अभी दिल्ली के कई हिस्सों में फैले हुए हैं। भारतीय सेना 'न्यू इंडिया' के दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है और भविष्य की चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होने के लिए भविष्य के लिए तैयार, प्रौद्योगिकी से लैस, घातक और फुर्तीली सेना में बदलने के लिए तैयार है। इस पहल के अनुरूप नए थल सेना भवन के विचार की कल्पना की गई है। सेना ने इसका डिजाइन भी शेयर किया है।
नए थल सेना भवन की खासियतें
- इसका निर्माण जनवरी 2023 में शुरू हुआ था और 832 करोड़ रुपये की लागत से 27 महीनों में पूरा होने वाला है। नया थल सेना भवन नए भारत की जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समग्र सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा होगा।
- नए भवन में भूतल के साथ-साथ सात मंजिला मुख्य कार्यालय परिसर, एक सुविधा क्षेत्र, एक बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर परिसर, एकल-पुरुषों के रहने की जगह, वाहन पार्किंग, इंजीनियरिंग सेवा क्षेत्र और भूनिर्माण शामिल होंगे।
- थल सेना भवन मजबूत ग्रिहा-अनुपालन (GRIHA-compliant) वाली भूकंप प्रतिरोधी इमारत होगी जिसमें विभिन्न निदेशालयों और विभागों के लिए अलग जगह होगी जो लगभग 1.5 लाख वर्गमीटर क्षेत्रफल में फैले हुए हैं।
- केंद्रीय रूप से वातानुकूलित मुख्य कार्यालय परिसर में डिजिटल इंटरफेस, ब्रीफिंग रूम, मेहमानों और ड्राइवरों के लिए वेटिंग रूम, निदेशालयों और विभागों के लिए विभिन्न कार्यालयों के अलावा सभी सुविधाओं के साथ पर्याप्त संख्या में सम्मेलन कक्ष होंगे।
- परिसर की सुरक्षा के जरूरी स्तर को सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय नियंत्रण कक्ष और एकीकृत भवन प्रबंधन प्रणाली प्रदान की जाएगी। यहां अनुकूलित स्थान, कुशल सर्कुलेशन क्षेत्र और एक सामान्य पुस्तकालय होगा।
- फैसिलिटी जोन के रूप में एक खास क्षेत्र भी होगा जिसमें फूड कोर्ट, क्रेच, जिम, वेट कैंटीन और जरूरी मेडिकल सुविधाओं के साथ एक एमआई रूम जैसी सुविधाएं होंगी। सुविधा क्षेत्र में एक परिवार कल्याण परिसर भी है।
2025 तक होगा तैयारकुल मिलाकर नया सेना भवन आधुनिक भारत और आधुनिक सेना की जरूरतों को देखते हुए बन रहा है। ये न सिर्फ सेना के बीच समन्वय को मजबूत करेगा बल्कि रक्षा क्षेत्र में देश की ताकत को भी बढ़ाएगा। भवन साल 2025 तक पूरा हो जाएगा।
