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क्या हाथ मिलाने वाले हैं राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे? शिवसेना (यूटीबी) ने दिया इस सवाल का जवाब

Maharashtra: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करने के बाद क्या उद्धव ठाकरे अपने चचेरे भाई राज ठाकरे से सुलह कर लेंगे? क्या उद्धव की शिवसेना और राज की मनसे एक होने वाली हैं? यूटीबी नेता ने इस सवाल पर कहा है कि राज ठाकरे और उद्धव ही हाथ मिलाने का फैसला कर सकते हैं।

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राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे।

Raj Thackeray and Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की सियासत में कभी भी कुछ भी हो सकता है। वो कहते हैं न राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता, और यहां बड़े से बड़ा दुश्मन कब आपका दोस्त बन जाए, इसकी भविष्यवाणी कर पाना बड़े से बड़े महारथियों के वश की बात नहीं है। यही वजह है कि इन दिनों राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच समझौते की बात होने लगी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों में मिली हार के बाद दोनों भाई हाथ मिलाने का फैसला कर सकते हैं। इसे लेकर शिवसेना (यूटीबी) के नेता की प्रतिक्रिया भी आई है।

उद्धव और राज ठाकरे ही करेंगे हाथ मिलाने पर फैसला

शिवसेना (यूटीबी) नेता अंबादास दानवे ने शनिवार को कहा कि केवल उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे ही यह तय कर सकते हैं कि वे दोनों हाथ मिलाना चाहते हैं या नहीं। दानवे ने कहा कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे की राजनीतिक स्थिति अस्पष्ट है और लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि वह राज्य सरकार का समर्थन कर रहे हैं या विरोध।

ठाकरे भाइयों को एक साथ आना चाहिए या नहीं?

विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष दानवे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘‘हर चुनाव में हार के बाद ऐसी चर्चाएं होती हैं (कि ठाकरे भाइयों को एक साथ आना चाहिए)। चुनाव के नतीजे आने के बाद हर आठ या दस दिन में आपको ये चर्चाएं देखने को मिलेंगी। केवल वे (ठाकरे बंधु) ही तय कर सकते हैं कि वे (एक साथ आना) चाहते हैं या नहीं। हमारी कोई भूमिका नहीं है।’’

'स्पष्ट नहीं है राज ठाकरे का राजनीतिक रुख'

उद्धव खेमे के वफादार नेता माने जाने वाले दानवे ने कहा कि राज ठाकरे का राजनीतिक रुख स्पष्ट नहीं है। दानवे ने कहा, ‘‘लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि राज ठाकरे का रुख सरकार के पक्ष में है या उसके खिलाफ। मनसे ने महायुति के खिलाफ उम्मीदवार उतारे, जबकि दूसरी ओर उन्होंने (राज ठाकरे ने) मुख्यमंत्री के रूप में (भाजपा के देवेंद्र) फडणवीस की वकालत की। उनके रुख में कोई स्पष्टता नहीं है।"

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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