Raj Thackeray and Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की सियासत में कभी भी कुछ भी हो सकता है। वो कहते हैं न राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता, और यहां बड़े से बड़ा दुश्मन कब आपका दोस्त बन जाए, इसकी भविष्यवाणी कर पाना बड़े से बड़े महारथियों के वश की बात नहीं है। यही वजह है कि इन दिनों राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच समझौते की बात होने लगी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों में मिली हार के बाद दोनों भाई हाथ मिलाने का फैसला कर सकते हैं। इसे लेकर शिवसेना (यूटीबी) के नेता की प्रतिक्रिया भी आई है।
उद्धव और राज ठाकरे ही करेंगे हाथ मिलाने पर फैसला
शिवसेना (यूटीबी) नेता अंबादास दानवे ने शनिवार को कहा कि केवल उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे ही यह तय कर सकते हैं कि वे दोनों हाथ मिलाना चाहते हैं या नहीं। दानवे ने कहा कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे की राजनीतिक स्थिति अस्पष्ट है और लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि वह राज्य सरकार का समर्थन कर रहे हैं या विरोध।
ठाकरे भाइयों को एक साथ आना चाहिए या नहीं?
विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष दानवे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘‘हर चुनाव में हार के बाद ऐसी चर्चाएं होती हैं (कि ठाकरे भाइयों को एक साथ आना चाहिए)। चुनाव के नतीजे आने के बाद हर आठ या दस दिन में आपको ये चर्चाएं देखने को मिलेंगी। केवल वे (ठाकरे बंधु) ही तय कर सकते हैं कि वे (एक साथ आना) चाहते हैं या नहीं। हमारी कोई भूमिका नहीं है।’’
'स्पष्ट नहीं है राज ठाकरे का राजनीतिक रुख'
उद्धव खेमे के वफादार नेता माने जाने वाले दानवे ने कहा कि राज ठाकरे का राजनीतिक रुख स्पष्ट नहीं है। दानवे ने कहा, ‘‘लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि राज ठाकरे का रुख सरकार के पक्ष में है या उसके खिलाफ। मनसे ने महायुति के खिलाफ उम्मीदवार उतारे, जबकि दूसरी ओर उन्होंने (राज ठाकरे ने) मुख्यमंत्री के रूप में (भाजपा के देवेंद्र) फडणवीस की वकालत की। उनके रुख में कोई स्पष्टता नहीं है।"
