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एपेक्सा ग्रुप घोटाला: ईडी की बड़ी कार्रवाई, करीब 16 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त

एपेक्सा ग्रुप निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 16 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत की, जिसमें जमीनें और बैंक खाता शामिल हैं। जांच में सामने आया कि ग्रुप ने ऊंचे मुनाफे का लालच देकर सैकड़ों करोड़ जुटाए, जिससे हजारों निवेशकों को नुकसान हुआ।

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एपेक्सा ग्रुप के निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की।(फोटो सोर्स: ANI)

एपेक्सा ग्रुप के निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 15.97 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई 22 जनवरी 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत की गई।

ईडी की जयपुर जोनल टीम ने इस मामले में 37 अचल संपत्तियों और एक बैंक खाते को जब्त किया है। अटैच की गई संपत्तियों में खेती और रिहायशी जमीनें शामिल हैं, जो राजस्थान के बूंदी, बारां और कोटा जिलों में स्थित हैं। ये संपत्तियां मुरली मनोहर नामदेव, दुर्गा शंकर मेरोथा, अनिल कुमार, गिरिराज नायक, शोभा रानी समेत अन्य आरोपियों के नाम पर दर्ज पाई गई हैं। इसके अलावा एपेक्सा ग्रुप के एक बैंक खाते में जमा 1.50 करोड़ रुपये भी जब्त किए गए हैं।

एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच

ईडी ने यह जांच राजस्थान पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि एपेक्सा ग्रुप ने निवेशकों को बेहद ऊंचे मुनाफे का लालच देकर करीब 194.76 करोड़ रुपये जुटाए। आरोप है कि मुरली मनोहर नामदेव और उनके साथियों ने जानबूझकर फर्जी निवेश योजनाएं तैयार कीं और भोले-भाले लोगों को इनमें फंसाया।

पुराने निवेशकों को नए पैसों से भुगतान

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, 2012 से 2020 के बीच निवेशकों को कभी-कभार आंशिक भुगतान किया गया या नए निवेशकों से आए पैसों से पुराने निवेशकों को रकम देकर यह दिखाया गया कि कारोबार मुनाफे में चल रहा है। कई निवेशकों को मिले मुनाफे को दोबारा निवेश करने के लिए भी उकसाया गया, जबकि असल में इतनी ज्यादा कमाई संभव ही नहीं थी और ये योजनाएं शुरू से ही टिकाऊ नहीं थीं।

कोरोना काल के दौरान जब बड़ी संख्या में निवेशकों ने अपने पैसे और मुनाफे की मांग की, तो एपेक्सा ग्रुप के पास भुगतान करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। इसी दौरान पूरा घोटाला उजागर हो गया और योजनाएं पूरी तरह धराशायी हो गईं, जिससे हजारों निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

जमीन और निजी कारोबार में लगाया गया पैसा

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल जमीनें खरीदने और नए निजी कारोबार खड़े करने में किया गया, ताकि आरोपी अपनी निजी संपत्ति बढ़ा सकें, न कि निवेशकों को कोई वैध लाभ दिया जा सके। ईडी का कहना है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और आने वाले समय में घोटाले से जुड़ी अन्य संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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