नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने छात्र आंदोलन और हाल के घटनाक्रम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। अपनी चिट्ठी में उन्होंने सरकार से आंदोलन को बलपूर्वक दबाने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की अपील की है।
अन्ना हजारे ने अपने पत्र में लिखा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने की बजाय बातचीत और आपसी सम्मान के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलनकारी छात्रों के साथ संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच के साथ संवाद करना चाहिए।
अन्ना हजारे ने लिखा,'नई दिल्ली में चल रहे आंदोलन की पृष्ठभूमि में कल हुई हिंसा तथा पुलिस कार्रवाई की खबरें अत्यंत पीड़ादायक हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस प्रकार की घटनाएं किसी के भी हित में नहीं हैं। मेरा दृढ़ मत है कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा,सार्वजनिक संपत्ति की क्षति तथा अनावश्यक बल प्रयोग से बचा जाना चाहिए। आज देश के लाखों युवा प्रश्नपत्र लीक,भर्ती प्रक्रियाओं में विलंब,बेरोज़गारी तथा अन्य अनेक समस्याओं के कारण गहरी चिंता और असंतोष का अनुभव कर रहे हैं। इस असंतोष को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में न देखकर, समाज की पीड़ा और अपेक्षाओं के रूप में समझना आवश्यक है।'
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'मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार नहीं गिर जाएगी'
अन्ना हजारे ने पत्र में कहा कि वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक के बाद भी परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। इस वर्ष भी लगभग 22 लाख विद्यार्थी इस परीक्षा में सम्मिलित हुए,जबकि प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आईं। निराशा के कारण 22 विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबरें भी हैं। उन्होंने लिखा कि जब किसी विभाग में अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर नहीं डाली जानी चाहिए। यदि जवाबदेही तय करते हुए संबंधित मंत्री का इस्तीफा लिया जाता है तो इससे सरकार की सत्ता नहीं जाएगी, बल्कि अन्य मंत्रियों को भी जवाबदेह शासन का संदेश मिलेगा। इससे सरकार की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनेगी। उन्होंने लिखा कि सरकारी कार्यप्रणाली में जब भी कोई अनियमितता या घोटाला उजागर होता है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर डाल दी जाती है, जबकि जो कुछ अच्छा होता है उसका श्रेय सरकार स्वयं लेती है। यह उचित नहीं है। जनता के प्रति अंतिम उत्तरदायित्व वरिष्ठ स्तर पर बैठे लोगों का होता है।सोनम वांगचुक को जबरन हटाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत
पीएम मोदी को संबोधित अपने पत्र में अन्ना हजारे ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि जिस तरह से प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से हटाया गया,वह लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता। साथ ही उन्हें हटाए जाने से पहले सरकार द्वारा उनके साथ किसी प्रकार की सार्थक बातचीत नहीं की गई। इतने दिनों तक दिल्ली में उनका अनशन चलता रहा,फिर भी सरकार का कोई प्रतिनिधि अथवा सचिव स्तर का अधिकारी आंदोलनकारियों से संवाद करने नहीं पहुंचा। सरकार को इस तरह के मामलों में टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
'सकारात्मक पहल की जरूरत'
अपने पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए लिखा कि छात्र आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिये से न देखा जाए,बल्कि युवाओं की भावनाओं और उनकी मांगों को समझते हुए सकारात्मक पहल की जाए। अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच रचनात्मक संवाद ही इस विवाद का स्थायी समाधान निकाल सकता है। आखिर में उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए आंदोलनकारी छात्रों के साथ बातचीत करेगी और ऐसा समाधान निकालेगी जिससे युवाओं का लोकतंत्र पर विश्वास और मजबूत हो।
