देश

अनंत सिंह की विधायकी पर संकट? बिहार विधानसभा ने जारी किया नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब

मोकामा के विधायक अनंत सिंह की विधायकी पर संकट गहरा गया है। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष ने अनंत सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।बिहार विधानसभा सचिवालय ने अपना पक्ष रखने के लिए 7 दिन समय दिया है।

Image

अनंत सिंह (फाइल फोटो)

जनता दल (यूनाइटेड) द्वारा पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 6 साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने जेडीयू (JD-U) की सिफारिश पर कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बिहार विधानसभा सचिवालय ने अनंत सिंह को अपना पक्ष रखने के लिए 7 दिन का समय दिया है।

जेडीयू ने एमएलसी (विधान परिषद) चुनाव के दौरान पार्टी उम्मीदवार का विरोध करने और जन सुराज प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने पर अनंत सिंह को निष्कासित किया था। इसके बाद पार्टी ने दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश विधानसभा अध्यक्ष से की थी।

दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में अनंत सिंह की जमानत रद्द

विधायकी जाने के खतरे के साथ-साथ हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में अनंत सिंह की जमानत रद्द कर दी है और उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। विधानसभा द्वारा दिए गए इस नोटिस का जवाब मिलने के बाद ही स्पीकर उनकी सदस्यता रद्द करने पर अंतिम फैसला लेंगे।

'दुलारचंद यादव की हत्या नीरज कुमार ने करवाई थी, ताकि उन्हें फंसाया जा सके'

वहीं 30 अक्टूबर को बिहार के मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के सरेंडर करने के आदेश के बाद जदयू नेता नीरज कुमार पर बड़ा हमला किया। अनंत सिंह ने दावा किया कि दुलारचंद यादव की हत्या नीरज कुमार ने करवाई थी, ताकि उन्हें फंसाया जा सके। दुलारचंद यादव हत्याकांड में ही आज अनंत सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है, जिसमें उन्हें सरेंडर करने के लिए कहा गया है।

अनंत सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का फैसला

निष्कासित विधायक अनंत को झटका देते हुए उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दुलारचंद यादव हत्या मामले में उन्हें 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। सिंह को पिछले साल अक्टूबर में हुई इस हत्या की साजिश रचने के आरोप में पहले गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, पटना उच्च न्यायालय ने इस साल मार्च में उन्हें जमानत दे दी थी। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने सिंह को मिली जमानत रद्द करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article