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'लद्दाख बौद्ध संस्कृति और करुणा की जीवित प्रयोगशाला...', लेह में बुद्ध पूर्णिमा पर बोले अमित शाह

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  • Updated May 1, 2026, 01:18 PM IST

Buddha Purnima 2026: लेह (लद्दाख) में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लद्दाख को बौद्ध संस्कृति और करुणा की 'जीवित प्रयोगशाला' बताया।

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अमित शाह ने लद्दाख को बताया बौद्ध संस्कृति की जीवित प्रयोगशाला

Photo : ANI

Buddha Purnima 2026: लेह (लद्दाख) में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर एक विशेष सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भी भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने लद्दाख को केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि बौद्ध संस्कृति और करुणा की एक “जीवित प्रयोगशाला” बताया। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सभ्यता हजारों वर्षों से शांति और अहिंसा का संदेश देती आई है। उन्होंने बताया कि इस भूमि पर सदियों से ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराएं सुरक्षित और जीवित हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जब दलाई लामा यहां आते हैं, तो वे भी लद्दाख को बौद्ध संस्कृति और करुणा का केंद्र मानते हैं।

पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ अवसर-अमित शाह

इस वर्ष की बुद्ध पूर्णिमा को विशेष बताते हुए अमित शाह ने कहा कि लगभग 75 वर्षों के बाद पवित्र बौद्ध अवशेष (Holy Relics) लद्दाख वापस लाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले इस क्षेत्र में बेहतर सड़क और परिवहन सुविधाएं नहीं थीं, जिस कारण बहुत कम लोग इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर पाते थे। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और अधिक लोग इसका आध्यात्मिक अनुभव ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार वैसाख पूर्णिमा के अवसर पर जब ये पवित्र अवशेष दोबारा लद्दाख पहुंचे हैं, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ अवसर है।

आंतरिक शांति और दिव्यता का अनुभव

लद्दाख, कारगिल और अन्य क्षेत्रों के लोग इनसे आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त करेंगे। अमित शाह ने यह भी कहा कि इन पवित्र अवशेषों के दर्शन से लोगों को आंतरिक शांति और दिव्यता का अनुभव होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह आयोजन बौद्ध धर्म के अनुयायियों के साथ-साथ अन्य समुदायों के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगा। बुद्ध पूर्णिमा भगवान गौतम बुद्ध के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है, जिन्हें बौद्ध धर्म का संस्थापक माना जाता है। उन्हें “एशिया का प्रकाश” भी कहा जाता है। माना जाता है कि बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण तीनों एक ही तिथि को हुए थे, जो इस दिन को और भी विशेष बनाता है।

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