लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के राजनीतिक जीवन में कई बार नक्सलियों और उनके समर्थकों से संपर्क के उदाहरण सामने आए हैं।
अमित शाह ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी नक्सल से जुड़े संगठनों की भागीदारी देखी गई थी। उन्होंने 2010 में ओडिशा में आयोजित एक कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए दावा किया कि एक माओवादी मंच से जुड़े नेता ने वहां भड़काऊ भाषण दिया और राहुल गांधी का स्वागत किया था।
गृह मंत्री ने 2018 में हैदराबाद में हुई एक बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें ऐसे लोगों की मौजूदगी थी, जिन्हें वैचारिक रूप से नक्सली तत्वों के करीब माना जाता है। उनके अनुसार, वर्षों में विभिन्न स्तरों पर समन्वय बैठकों और संपर्क के कई उदाहरण सामने आए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आज भी कुछ जगहों पर हिडमा जैसे व्यक्तियों के समर्थन में नारे लगाए जाते हैं और ऐसे तत्वों को सही ठहराने की कोशिश होती है। शाह का कहना था कि इन घटनाओं से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस और उसके नेता नक्सली विचारधारा के करीब पहुंच रहे हैं।
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि देश की जनता इस तरह की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी और इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव में देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता ऐसे रुख के खिलाफ मजबूती से खड़ी होगी।
