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भारत के 119 अवैध प्रवासियों को लेकर आज अमृतसर पहुंचेगा अमेरिकी विमान, देख लीजिए पूरी डिलेट

Illegal Immigrants Issue: अमेरिका से निर्वासित भारतीय नागरिकों को लेकर एक और विमान आज अमृतसर पहुंचने वाला है, ऐसे में इस मुद्दे पर सियासत भी जोर पकड़ने लगी है। एक दिन पहले ही ट्रंप से मुलाकात पर अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर जवाब दिया था। इससे पहले 104 निर्वासित लोगों को लेकर पहली उड़ान 5 फरवरी को अमृतसर में उतरी थी।

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Illegal Indian Immigrants: 119 अवैध प्रवासियों को लेकर आज अमेरिकी विमान अमृतसर पहुंचेगा।

India-America: अमेरिका का एक सैन्य विमान देश में अवैध रूप से रह रहे 119 भारतीयों को लेकर शनिवार रात अमृतसर पहुंचेगा। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह डोनाल्ड ट्रंप के पिछले महीने अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद यहां से निर्वासित किया जाने वाला भारतीयों का दूसरा जत्था होगा। महीने की शुरुआत में अमेरिका का एक सैन्य विमान भारत के विभिन्न राज्यों के 104 अवैध प्रवासियों को लेकर अमृतसर पहुंचा था। ट्रंप प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के तहत इन लोगों को भारत निर्वासित किया था।

119 अवैध प्रवासियों को लेकर अमृतसर पहुंचेगा अमेरिकी विमान

सूत्रों ने को बताया कि एक सैन्य विमान 119 भारतीयों को लेकर 15 फरवरी को पंजाब के अमृतसर पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि विमान के शनिवार रात करीब 10 बजे अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका से निर्वासित किए जाने वाले 119 अवैध भारतीय प्रवासियों में पंजाब के 67, हरियाणा के 33, गुजरात के आठ, उत्तर प्रदेश के तीन, गोवा, महाराष्ट्र और राजस्थान के दो-दो और हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर का एक-एक व्यक्ति शामिल है।

पीएम मोदी ने भारतीय अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर दी थी प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री मोदी ने अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा कि यह केवल भारत का मुद्दा नहीं है, यह एक वैश्विक समस्या है। जो लोग अवैध तरीके से दूसरे देशों में रह रहे हैं, उन्हें वहां रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। जहां तक भारत और अमेरिका का सवाल है, अगर किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता की पुष्टि हो जाती है और वह अमेरिका में अवैध रूप से रह रहा है, तो भारत उसे वापस लेने के लिए तैयार है।

ट्रंप प्रशासन अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों के दूसरे जत्थे को ऐसे समय में निर्वासित करेगा, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाशिंगटन में ट्रंप के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मानव तस्करी के उस ‘‘पारिस्थितिकी तंत्र’’ के खिलाफ लड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो आम परिवारों के लोगों को बड़े सपनों और वादों का झांसा देकर दूसरे देशों में अवैध प्रवासियों के रूप में बसाने में संलिप्त है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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