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पहलगाम हमले में भी अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन बना आतंकियों का मददगार, इसी से हुई थी हमले की जगह की पहचान! दिखा देता है चप्पे-चप्पे की तस्वीर

पहलगाम आतंकी हमले के दौरान हमलावरों ने अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन का सहारा लेकर लोकेशन तक पहुंचे थे। अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन के जरिए ही हमले के बाद सुरक्षित वहां से भागने में कामयाब भी रहे।

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पहलगाम हमले में भी अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन बना आतंकियों का मददगार (प्रतीकात्मक फोटो- Canva)

जम्मू कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में भी आतंकियों को रास्ता अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन ने दिखाया था। अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन के जरिए ही आतंकियों ने हमले वाली जगह की पहचान की थी और हमले के बाद भी इसी के सहारे वहां से भाग निकले थे। अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन जम्मू कश्मीर के कोने-कोने की तस्वीर दिखा देता है। खुफिया सुरक्षा एजेंसी सूत्रों के मुताबिक पहलगाम के जंगलों में आतंकवादियों ने टूरिस्ट स्पॉट तक पहुंचने के लिए अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया था।

सभी आतंकियों के पास था अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन

सूत्रों के मुताबिक आतंकवादी इस इंक्रिप्टेड एप्लीकेशन के जरिए उस टूरिस्ट स्पॉट पर पहुंचने में कामयाब रहे जहां पर बहुत ज्यादा भीड़ थी। इस मामले की जांच कर रही जांच एजेंसियों के मुताबिक भारतीय खुफिया एजेंसी की ट्रैकिंग से बचने के लिए बाकायदा पाकिस्तान सेना की शह पर इस ऐप को तैयार कराया गया है। इसके बाद इस ऐप को कैसे इस्तेमाल करना है उसकी पेशेवर ट्रेनिंग सीमा पार इन आतंकवादियों को उनके हैंडलर ने दी। पहलगाम आतंकी हमले में शामिल सारे आतंकियों को इस ऐप को चलाने की ट्रेनिंग दी गई थी।

अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन कैसे कर रहा है आतंकियों को मदद

अल्पाइन क्वेस्ट एप्लिकेशन से आतंकी हाइलैंड और दुर्गम इलाकों में गोपनीय रास्ते और कस्टम ट्रेल्स बनाने के लिए कर रहे हैं। कश्मीर जैसे पहाड़ी और जंगलों से भरे इलाकों में ये ट्रेल्स सुरक्षा बलों से बचने के लिए बनाए जा रहे हैं। ऐप के द्वारा आतंकवादी अपनी वास्तविक लोकेशन को ट्रैक कर सकते हैं, जिससे उन्हें किसी खास क्षेत्र में छिपने या स्थानांतरित होने में मदद मिलती है। यह उनकी सुरक्षा को बनाए रखने और सुरक्षा बलों से बचने में सहायक हो सकता है। अल्पाइन क्वेस्ट ऐप में ऑफलाइन मैप्स का फीचर होता है, जिससे नेटवर्क न मिलने के बावजूद भी आतंकवादी अपने रास्ते पर चल सकते हैं और गुप्त स्थानों को पहचान सकते हैं। यह उन्हें इंटरनेट या फोन ट्रैकिंग से बचने की अनुमति देता है। आतंकवादी अल्पाइन क्वेस्ट का उपयोग करके सुरक्षा बलों के रास्तों और गश्ती पैटर्न को समझ सकते हैं, जिससे वे उन क्षेत्रों से सुरक्षित तरीके से बचकर निकलने की योजना बना सकते हैं। वे सुरक्षा बलों के गश्ती समय और रूट्स का पूर्वानुमान भी कर सकते हैं। कश्मीर जैसे क्षेत्रों में जहां घने जंगल और पर्वतीय इलाके होते हैं, आतंकी इस ऐप का इस्तेमाल करके छिपने के स्थान और दुर्गम इलाके तय कर सकते हैं।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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