देश

संजय सिंह को मिलेगी जमानत या जाना पड़ेगा जेल? हाईकोर्ट में सुनवाई आज; जानें किस मामले में हुई है सजा

Court News: आप सांसद संजय सिंह की मुश्किलों में एक बार फिर इजाफा हो सकता है। उन्हें फिर से जेल की हवा खानी होगी या फिर जमानत मिल जाएगी, इसका फैसला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट को करना है। उनकी जमानत याचिका पर आज सुनवाई होगी। आपको वो साल 2001 के वो विवाद के बारे में बताते हैं।

Image

क्या संजय सिंह को मिलेगी जमानत

Bail Plea of Sanjay Singh: आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह एक बार फिर मुश्किलों में घिर गए हैं। उन्हें जेल जाना पड़ेगा या फिर अदालत से जमानत मिल जाएगी, इसका फैसला अदालत को करना है। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि संजय सिंह को 2001 में सड़क पर प्रदर्शन को लेकर उनके खिलाफ दर्ज मामले के संबंध में बृहस्पतिवार तक सुलतानपुर की अदालत में आत्मसमर्पण करने की जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट ने पुष्टि की कि वह सांसद की जमानत याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगा, जब इसे पुनरीक्षण याचिका के साथ लखनऊ पीठ के समक्ष लाया जाएगा।

'आत्मसमर्पण करने की आवश्यकता नहीं'

न्यायमूर्ति के एस पवार ने संजय सिंह के वकीलों द्वारा बताई गई तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए बुधवार को अंतरिम आदेश पारित किया था। आप नेता के वकीलों ने कहा था कि उन्हें बृहस्पतिवार को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक में भाग लेना है। हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक मामला बृहस्पतिवार को उसके समक्ष नहीं आता, 'आरोपी पुनरीक्षणकर्ता को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने की आवश्यकता नहीं है।'

साल 2023 में दोषी ठहराए गए थे संजय सिंह

अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा, 'यह भी प्रावधान किया गया है कि अधीनस्थ अदालत द्वारा जारी कोई भी प्रक्रिया कल तक स्थगित रहेगी।' संजय सिंह और पांच अन्य को सुलतानपुर की एक अदालत ने 11 जनवरी, 2023 को इस मामले में दोषी ठहराया था और इस साल छह अगस्त को सत्र अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी थी।

हाईकोर्ट में 14 अगस्त को हुई थी सुनवाई

राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट में दलील दी कि सिंह की पुनरीक्षण याचिका विचारणीय नहीं है, क्योंकि सत्र न्यायालय ने उन्हें सजा काटने के लिए नौ अगस्त को निचली अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। लेकिन, सिंह ने आत्मसमर्पण नहीं किया। इससे पहले, हाईकोर्ट ने 14 अगस्त को इस मामले की सुनवाई की थी।

एक दिन पहले, 13 अगस्त को सुलतानपुर की सांसद/विधायक अदालत ने सिंह, समाजवादी पार्टी के नेता अनूप संडा और चार अन्य के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। लेकिन, आरोपी मंगलवार को सुनवाई के लिए सुलतानपुर अदालत में पेश नहीं हुए और स्थानीय अदालत ने इस पर आपत्ति जताई।

किस मामले में संजय सिंह को हुई है सजा?

आपको बता दें कि खराब बिजली आपूर्ति के विरोध में 19 जून 2001 को सुलतानपुर के सब्जी मंडी इलाके के पास पूर्व सपा विधायक अनूप संडा के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया था। इसमें संजय सिंह के साथ पूर्व पार्षद कमल श्रीवास्तव, विजय कुमार, संतोष और सुभाष चौधरी ने भी हिस्सा लिया था। इन सभी के खिलाफ कोतवाली नगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। विशेष न्यायाधीश योगेश यादव ने 11 जनवरी 2023 को संजय सिंह समेत सभी छह आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन माह की कैद की सजा सुनाई थी।

हालांकि, मामले में जमानत मिलने के बाद उन्होंने सजा के खिलाफ स्थानीय सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया मगर उसने उनकी याचिका खारिज कर दी। बाद में, उन्होंने एक पुनरीक्षण याचिका के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिस पर आज यानी 22 अगस्त को सुनवाई होनी है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article