शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इसके मुताबिक कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया है। हाई कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत देते हुए झूंसी पुलिस स्टेशन में दर्ज सेक्सुअल हैरेसमेंट केस में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
कोर्ट के आदेश में मामले में अगली सुनवाई तक ज़बरदस्ती कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी गई है। इससे पहले अविमुक्तेश्वरानंद के अग्रिम जमानत मामले की सुनवाई कोर्ट में हुई। सरकार ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाया है।
अपर महाधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा और उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत अर्जी सीधे हाईकोर्ट में नहीं आ सकती। गोयल ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी
इससे पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। बता दें कि झूंसी पुलिस स्टेशन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरि और दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है जिसके बाद उनपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के जरिए याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर जल्द सुनवाई हो सकती है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज
तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने 173 (4) के तहत जिला कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। एडीजे रेप एंड पोक्सो स्पेशल कोर्ट विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया था। कोर्ट के इस आदेश के अनुपालन में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। झूंसी थाना पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और दो-तीन अज्ञात के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की है। यह एफआईआर बीएनएस की धारा 351(3), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 5l, 6,3,4(2),16 और 17 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना भी शुरू कर दी है। अब उनपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
शंकराचार्य ने किया साजिश का दावा
वहीं, इन गंभीर आरोपों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सनातन धर्म के खिलाफ एक बड़ी साजिश करार दिया। 23 फरवरी को उन्होंने वाराणसी में कहा कि यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है और समय आने पर सच सबके सामने आ जाएगा। स्वामी ने दावा किया कि जिन लड़कों के साथ दुर्व्यवहार की बात कही जा रही है, वे कभी उनके गुरुकुल में नहीं रहे और न ही उनका इस आश्रम से कोई लेना-देना है। उनके अनुसार, उन छात्रों की मार्कशीट इस बात का सबूत है कि वे हरदोई के एक स्कूल के छात्र हैं।अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि जब वे कभी यहां नहीं आए, और इस जगह से उनका कोई संबंध नहीं है, तो कोई उनके साथ कुछ कैसे कर सकता है? वे भ्रम फैला रहे हैं यह कहकर कि, 'एक सीडी है' अगर है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?
