भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके के जिन 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया उसमें बहावलपुर भी एक है। बहावलपुर पाकिस्तान की सीमा में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से करीब 100 किमी अंदर है। इस आतंकी ठिकाने को निशाना बनाने के पीछे प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर है। जी हां, ये वही मौलाना मसूद अजहर है, जिसे साल 1999 में हुए प्लेन हाईजैक में भारत को कांधार जाकर छोड़ना पड़ा था।
जी हां, बहावलपुर आतंकवादी संगठन जैश-ए-मुहम्मद का मुख्यालय था और आतंकी संगठन का प्रमुख केंद्र था। बात करें बहावलपुर की तो यह पाकिस्तान का 12वां सबसे बड़ा शहर है। जिस आतंकी ठिकाने को भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत निशाना बनाया वह जैश का हेडक्वार्टर था और जामा मस्जिद सुभान अल्ला में था। इसे उस्मान-ओ-अली कैंपस भी कहा जाता था। जैश का यह हेडक्वार्टर 18 एकड़ में फैला था, जिसके बीच में मस्जिद थी। यहां मदरसे में 600 छात्र रहते थे, जिसमें जिम, स्वीमिंग पूल और अस्तबल भी था। वैसे तो यह एक धार्मिक केंद्र था, लेकिन यहां से आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता था। साल 2011 से ही यह पूरी तरह से एक आतंकी ट्रेनिंग कैंप के तौर पर काम कर रहा था।
कौन है मौलाना मसूद अजहर
मौलाना मसूद अजहर वही आतंकवादी है, जिसने जैश-ए-मुहम्मद की नींव रखी। मसूद अजहर दक्षिण एशिया में आतंकवाद के इतिहास का प्रमुख चेहरा है। अजहर का जन्म 1968 में बहावलपुर में ही हुआ था। साल 1994 में अपने आतंकी मंसूबों के साथ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हाथों पकड़े जाने से पहले वह आतंकवादी संगठन हरकत-उल-मुजाहिद्दीन में एक मौलवी था।
1999 के बाद असली चेहरा दिखा
साल 1999 में भारत के एक विमान को आतंकवादियों ने नेपाल से हाईजैक कर लिया। आतंकवादी एयर इंडिया के इस विमान IC-814 को हाईजैक करके कांधार (अफगानिस्तान) ले गए। आतंकवादियों ने विमान को छोड़ने के बदले मौलाना मसूद अजहर और अन्य आतंकवादियों को छुड़वा लिया। तब भारत को आतंकवादियों की मांग के आगे झुकना पड़ा और आतंकी मौलाना मसूद अजहर को छोड़ना पड़ा। इसके बाद मौलाना मसूद अजहर का आतंकी चेहरा पूरी तरह से दुनिया के सामने आया।
2002 में पाकिस्तान ने प्रतिबंध लगाने का नाटक किया
साल 2000 में मौलाना मसूद अजहर ने कराची में जैश-ए-मुहम्मद की नींव रखी और उसका सिर्फ एक ही मकसद था कि जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाया जाए। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने दुनिया को दिखाने के लिए साल 2002 में जैश ए मुहम्मद पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन यह आतंकवादी संगठन उसके बाद भी काम करता रहा।
पिछले दो दशक से ज्यादा समय में भारत में हुए कई आतंकी हमलों में जैश-ए-मुहम्मद का बड़ा हाथ रहा है। आज जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान और PoK में ऑपरेशन सिंदूर किया तो इसमें जैश के मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया।
Operation Sindoor में मसूद अजहर के परिवार के 10 लोग मारे गए
आतंकी मौलाना मसूद अजहर ने स्वीकार किया है कि उसके परिवार के 10 लोग भारत के इस हमले में मारे गए हैं। मौलाना मसूद अजहर ने कहा कि उसकी बहन और बहनोई इस हमले में मारे गए हैं। जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर ने बुधवार को कबूल किया कि बहावलपुर में उसके संगठन के मुख्यालय पर भारतीय मिसाइल हमले में उसके परिवार के 10 सदस्य और चार करीबी सहयोगी मारे गए हैं। अजहर के हवाले से जारी एक बयान में कहा गया कि बहावलपुर में जामिया मस्जिद सुभान अल्लाह पर हमले में मारे गए लोगों में जैश सरगना की बड़ी बहन और उसका पति, एक भांजा और उसकी पत्नी, एक भांजी और परिवार के पांच अन्य बच्चे शामिल हैं।
बयान में कहा गया कि हमले में अजहर के एक करीबी सहयोगी और उसकी मां तथा दो अन्य करीबी साथियों की भी जान चली गई। भारत के इस हमले से आतंकी आका सदमे में हैं। चलिए जानते हैं भारत में जैश-ए-मुहम्मद ने कब-कब बड़े आतंकी हमले किए।
इन बड़े आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार जैश
- अप्रैल 2000 : जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में 15 कॉर्प्स हेडक्वार्टर के बाहर एक आत्मघाती कार हमला हुआ, जिसमें 4 भारतीय सैनिक शहीद हो गए।
- अक्टूबर 2001: जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हुए आत्मघाती हमले में 30 लोगों की मौत हो गई थी।
- दिसंबर 2001: लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद ने मिलकर दिल्ली में भारतीय संसद पर हमला किया, इस हमले में 14 लोगों की मौत हो गई थी।
- जनवरी 2016: जैश-ए-मुहम्मद ने पठानकोट एयरबेस पर हमला किया। इस आतंकी हमले में भारतीय सुरक्षा बलों के 3 जवान शहीद हो गए थे।
- सितंबर 2016: जैश-ए-मुहम्मद के आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना पर बड़ा आतंकी हमला किया। इस आतंकी हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारत ने PoK में सर्जिकल स्ट्राइक की थी।
- फरवरी 2019: जैश के आतंकवादियों ने पुलामा में सीआरपीएफ के कॉनवॉय को निशाना बनाकर आत्मघाती हमला किया, जिसमें CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक को अंजाम देकर आतंकवादियों और पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया।
- पहलगाम हमला : माना जा रहा है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में पर्यटकों पर हुआ आतंकी हमला भी जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के समर्थन से ही हुआ है।
